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Ambiya e Kiram

हिस्सा-3 हज़रत आदम अलैहिस्सलाम

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Friday *** Ambiya ikram ******

हिन्दी/hinglish हिस्सा-3
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम

  • हज़रत आदम अलैहिस्सलाम जन्नत से सरनदीप पहाड़ पर उतारे गए जो कि अब श्रीलंका में है उस वक़्त हिंदुस्तान ही था और हज़रते हव्वा जद्दा में और इब्लीस लईन को आप दोनों से पहले ही ईला में उतार दिया गया था,मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि हिंदुस्तान की ज़मीन इसलिये हरी भरी और खुशबुदार है और वहां ऊद वग़ैरह पैदा होने की वजह ये है कि हज़रत आदम अलैहिस्सलाम जब जन्नत से आये तो उनके जिस्म पर जन्नत के पत्ते थे जो हवा से उड़कर जिस दरख़्त पर चले गए वो हमेशा के लिए खुशबूदार हो गया

📕 तज़किरातुल अम्बिया,सफह 54

  • हज़रत आदम अलैहिस्सलाम और हज़रते हव्वा रज़ियल्लाहु तआला अंहा का निकाह जन्नत में हुआ और आपके निकाह का खुतबा खुद खुदा ने पढ़ा और हज़रते हव्वा रज़ियल्लाहु तआला अंहा का महर हमारे नबी सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम पर दुरूद पढ़ना बांधा गया

📕 मदारेजुन नुबूवत,जिल्द 2,सफह 5

  • आप जन्नत से कुछ सामान भी अपने साथ लाये मसलन हजरे अस्वद,असाये मूसवी,हथौड़ा,संडासी,ईरन,कुछ सोना चांदी,कुछ बीज,बेलचा,कुदाल,ऊद,सुलेमानी अंगूठी

📕 तफसीरे नईमी,जिल्द 1,सफह 330
📕 तफसीरे सावी,जिल्द 1,सफह 30

  • जन्नत से आने के बाद आप अलैहिस्सलाम 300 साल तक रोते रहे और आसमान की तरफ सर मुबारक उठाकर भी ना देखा,हदीसे पाक में आता है कि सारी दुनिया के आंसू अगर इकठ्ठा किये जाएं तो हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के आंसू सबसे ज़्यादा होंगे,फिर 300 साल के बाद अचानक एक दिन आपके दिल में इल्क़ा हुआ कि मैं जब जन्नत में था तो जन्नती महलों पर दरख्तों के पत्तों पर हूरों के सीनों पर ला इलाहा इल्लललाह मुहम्मदुर रसूल अल्लाह लिखा देखा है,ज़रूर ये कोई बुज़ुर्ग हस्ती है जिसका नाम मौला ने अपने नाम के साथ रखा है,तब हज़रत आदम अलैहिस्सलाम ने हमारे आक़ा हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वस्सल्लम के वसीले से दुआ फरमाई तो मौला ने आपकी तौबा क़ुबूल फरमाई ये दिन मुहर्रम की दसवीं जुमा था,जन्नत में आपकी ज़बान अरबी थी मगर ज़मीन पर सुरयानी बोलने लगे बाद क़ुबूले तौबा फिर से आपकी ज़बान अरबी हो गई

📕 पारा 1,सूरह बक़र,आयत 37
📕 तज़किरातुल अम्बिया,सफह 57
📕 तफसीरे नईमी,जिल्द 1,सफह 337-340

  • बाद क़ुबूले तौबा हज़रत आदम अलैहिस्सलाम और हज़रते हव्वा रज़ियल्लाहु तआला अंहा की मुलाकात 9 ज़िल्हज्ज को मक़ामे अराफात में हुई,चुंकि ये दिन खुशी का था इसलिए इसे अरफा और इस मक़ाम को अराफात कहा जाने लगा

📕 तफसीरे नईमी,जिल्द 2,सफह 297

  • क़ाबील और हाबील का वाक़िया कुछ यूं पेश आया कि हज़रते हव्वा रज़ियल्लाहु तआला अंहा 40 मर्तबा हामिला हुईं,39 बार 2 बच्चे साथ में पैदा हुए एक लड़का और एक लड़की,और चालीसवें बार में हज़रत शीश अलैहिस्सलाम अकेले पैदा हुए,उनकी शरियत में साथ में पैदा होने वाले बच्चे ही बहन भाई होते और दूसरे हमल से हुए बच्चों के साथ उनका निकाह होता था,तो हुआ युं कि क़ाबील के साथ जो लड़की पैदा हुई उसका नाम अक़लीमा था जो बहुत खूबसूरत थी और हाबील के साथ जो लड़की पैदा हुई उसका नाम लिब्वा या लिव्दा था जो कि अक़लीमा की तरह खूबसूरत नहीं थी,तो क़ाबील की शादी लिब्वा से और हाबील की शादी अक़लीमा से तय हुई मगर क़ाबील इसके लिए तैयार ना हुआ वो अपने साथ ही पैदा हुई लड़की से शादी करना चाहता था जो कि हराम था,जब क़ाबील ना माना तो हज़रत आदम अलैहिस्सलाम ने दोनों को क़ुरबानी पेश करने को कहा कि जिसकी क़ुरबानी क़ुबूल होगी वो अक़लीमा से निकाह करेगा,उस वक़्त का मामूल ये था कि जिसकी क़ुरबानी क़ुबूल हो जाती थी तो आसमान से आग आकर वो क़ुरबानी निगल जाती,दोनों ने क़ुरबानी पेश की तो हज़रते हाबील की क़ुरबानी क़ुबूल हो गई ये देखकर क़ाबील और ज़्यादा हसद में भर गया और अपने भाई को क़त्ल करने का प्लान बनाया,ज़मीन पर अब तक क़त्ल जैसा संगीन जुर्म नहीं हुआ था सो उसे क़त्ल करने का तरीक़ा भी नहीं आता था,एक दिन हाबील दरख्त के नीचे सो रहे थे तो इब्लीस ने क़ाबील के सामने एक परिंदे का सर पत्थर से कुचल दिया,ये देखकर क़ाबील को क़त्ल का तरीका मालूम हुआ और उसने भी वैसा ही किया और हाबील को पत्थर से कुचल कर मार दिया,अब मार तो दिया मगर लाश का क्या करता सो उसे पुश्त पर उठाये 40 दिनों तक युंही फिरता रहा,फिर अल्लाह ने 2 कौवों को भेजा एक ने दूसरे को मार दिया फिर अपनी चोंच से ज़मीन खोदकर गढ़ा किया और मरे हुये कौवे को उसमे दबाकर उड़ गया,तो क़ाबील ने भी वैसे ही अपने भाई को जमीन में दफन कर दिया,हाबील की क़त्ल की खबर सुनकर हज़रत आदम अलैहिस्सलाम इतने ज़्यादा ग़मज़दा हुये कि आप 100 साल तक मुस्कुराये नहीं फिर मौला ने आपको हज़रत शीश अलैहिस्सलाम की बशारत दी तो आप मुस्कुराये,क़त्ल का ये वाक़िया मंगल के दिन पेश आया और उस वक़्त हज़रते हाबील की उम्र 20 साल और क़ाबील की 25 साल और हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की उम्र 125 साल थी

📕 तज़किरातुल अम्बिया,सफह 56-61
📕 तफसीर रूहुल बयान,जिल्द 1,सफह 555
📕 अजायबुल क़ुरान,सफह 95

  • क़त्ल से पहले क़ाबील बहुत खूबसूरत था मगर जैसे ही उसने ये जुर्म किया उसका चेहरा सियाह पड़ गया और अक़्ल भी ज़ायल हो गई,उसको उसी के बेटे ने जो कि अंधा था पत्थर मार मारकर हलाक कर दिया,उस पर अज़ाब ये है कि उसको पिंडली से उल्टा लटकाया गया है और उसका मुंह सूरज की तरफ है और सूरज के घूमने के साथ-साथ वो भी घूमता रहता है,और क़यामत के दिन पूरे जहन्नम के अज़ाब का आधा हिस्सा अकेले उस पर डाला जायेगा

📕 तफसीर रूहुल बयान,जिल्द 1,सफह 556

  • आपके विसाल से पहले ज़मीन पर आपकी औलाद की तादाद 40000 पहुंच चुकी थी कुछ रिवायतों में 1 लाख भी आता है

📕 तफसीरे नईमी,जिल्द 1-4,सफह 340-416

  • 2 नबी यानि हज़रत शीश अलैहिस्सलाम और हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम आपकी ज़िन्दगी में पैदा हो चुके थे,हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम को आपका 100 साल का ज़माना मिला मगर नबी होने का ऐलान आपने हज़रत आदम अलैहिस्सलाम के विसाल के 200 साल बाद किया

📕 तफसीरे सावी,जिल्द 3,सफह 73

  • आपकी उम्र 1000 साल हुई

📕 अलइतकान,जिल्द 2,सफह 175
📕 ज़रकानी,जिल्द 1,सफह 64

  • मगर हदीसे पाक में आता है कि आपकी उम्र तो 1000 साल थी पर उसमें से आपने 40 साल हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम को दे दिए थे तो 960 साल आप ज़मीन पर रहे और अपनी उम्र देकर आप भूल भी गए,जिसके सबब बनी इंसान को निस्यान की बीमारी लाहिक़ हुई

📕 मिश्कात,जिल्द 2,सफह 400

  • आपने इतनी मुद्दत ज़मीन पर गुज़ारी मगर कभी भी आपने कुंअें से पानी नहीं पिया बल्कि आप हमेशा बारिश का पानी ही पिया करते थे

📕 तफसीरे अज़ीज़ी,जिल्द 1,सफह 172

  • आपकी क़ब्रे मुबारक में इख्तिलाफ है मगर मशहूर यही है कि आपकी क़ब्र मक्का मोअज़्ज़मा से तक़रीबन 5 किलोमीटर दूर मक़ामे मिना में जहां हज्जाज लोग क़ुरबानी करते हैं वहीं पर मस्जिदे खैफ के आस-पास है,आपकी नमाज़े जनाज़ा हज़रते जिब्रील अलैहिस्सलाम ने पढ़ाई और 4 तकबीर कही गई

📕 तफसीरे नईमी,जिल्द 1,सफह 332
📕 तज़किरातुल अम्बिया,सफह 62
📕 ज़रकानी,जिल्द 1,सफह 65


Hazrat Aadam Alaihissalam

  • Hazrat aadam alaihissalam jannat se sarandeep pahaad par utaare gaye jo ki ab srilanka me hai us waqt hindustan hi tha aur hazrate hawwa jadda me aur iblees layeen ko aap dono sde pahle hi eela me utaar diya gaya tha,maula ALI raziyallahu taala anhu farmate hain ki hindustan ki zameen isliye hari bhari aur khushbudar hai aur wahan ood wagairah paida hone ki wajah ye hai ki hazrat aadam alaihissalam jab jannat se aaye to unke jism par jannat ke patte the jo hawa se udkar jis darakht par chale gaye wo hamesha ke liye khushbudar ho gaya

📕 Tazkiratul ambiya,safah 54

  • Hazrat aadam alaihissalam aur hazrate hawwa raziyallahu taala anha ka nikah jannat me hua aur aapke nikah ka khutba khud khuda ne padha aur hazrate hawwa raziyallahu taala anha ka mahar hamare nabi sallallaho taala alaihi wasallam par durood padhna baandha gaya

📕 Madarejun nubuwat,jild 2,safah 5

  • Aap jannat se kuchh saaman bhi apne saath laaye maslan Hajre aswad,Asaye moosvi,Hathauda,Sandaasi,Eeran,Kuchh sona chandi,Kuchh beej,Belcha,Kudaal,Ood,sulemani anguthi

📕 Tafseere nayimi,jild 1,safah 330
📕 Tafseere saavi,jild 1,safah 30

  • Jannat se aane ke baad aap alaihissalam 300 saal tak rote rahe aur aasman ki taraf sar mubarak uthakar bhi na dekha,hadise paak me aata hai ki saari duniya ke aansu agar ikattha kiye jaayen to hazrat aadam alaihissalam ke aansu sabse zyada honge,phir 300 saal ke baad achanak ek din aapke dil me ilqa hua ki main jab jannat me tha to jannati mahlo par darakhto ke patto par hooro ke seeno par maine LAA ILAAHA ILLALLAH MUHAMMADUR RASOOL ALLAH likha dekha hai,zaroor ye koi buzurg hasti hai jiska naam maula ne apne naam ke saath rakha hai,tab hazrat aadam alaihissalam ne hamare aaqa huzoor sallallaho taala alaihi wassallam ke waseele se dua farmayi to maula ne aapki tauba qubool farmayi ye muharram ki daswi aur din juma tha,jaanat me aapki zabaan arbi thi magar zameen par suryani bolne lage baad qubule tauba firse aapki zabaan arbi ho gayi

📕 Paara 1,surah baqar,aayat 37
📕 Tazkiratul ambiya,safah 57
📕 Tafseere nayimi,jild 1,safah 337-340

  • Baad qubule tauba hazrat aadam alaihissalam aur hazrate hawwa raziyallahu taala anha ki mulaqat 9 zilhajj ko maqame arafaat me huyi,chunki ye din khushi ka tha isliye ise arfa aur is maqaam ko arfaat kaha jaane laga

📕 Tafseere nayimi,jild 2,safah 297

  • Qaabeel aur haabeel ka waqiya kuchh yun pesh aaya ki hazrate hawwa raziyallahu taala anha 40 martaba haamila huyin,39 baar 2 bachche saath me paida hue ek ladka aur ek ladki,aur chaaliswe baar me hazrat sheesh alaihissalam akele paida hue,unki shariyat me saath me paida hone waale bachche hi bahan bhai hote aur doosre hamal se hue bachcho ke saath unka nikah hota tha,to hua yun ki qaabeel ke saath jo ladki paida huyi uska naam aqlima tha jo bahut khoobsurat thi aur haabeel ke saath jo ladki paida huyi uska naam libwa ya liwda tha jo ki aqlima ki tarah khoobsurat nahin thi,to qaabeel ki shaadi libwa se aur haabeel ki shaadi aqlima se tai huyi magar qaabeel iske liye taiyar na hua wo apne saath hi paida huyi ladki se chaadi karna chahta tha jo ki haraam tha,jab qaabeel na maana to hazrat aadam alaihissalam ne dono ko qurbani pesh karne ko kaha ki jiski qurbani qubool hogi wo aqlima se nikah karega,us waqt ka maamool ye tha ki jiski qurbani qubool ho jaati thi to aasmaan se aag aakar wo qurbani nigal jaati,dono ne qurbani pesh ki to hazrate haabeel ki qurbani qubool ho gayi ye dekhkar qaabeel aur zyada hasad me bhar gaya aur apne bhai ko qatl karne ka plan banaya,zameen par abtak qatl jaisa sangeen jurm nahin hua tha so use qatl karne ka tariqa bhi nahin aata tha,ek din haabeel darakht ke neeche so rahe the to iblees ne qaabeel ke saamne ek parinde ka sar patthar se kuchal diya,ye dekhkar qaabeel ko qatl ka tariqa maaloom hua aur usne bhi waisa hi kiya aur haabeel ko patthar se kuchal kar maar diya,ab maar to diya magar laash ka kya karta so uski laash ko pusht par uthaye 40 dino tak yunhi firta raha,phir ALLAH ne 2 kawwo ko bheja ek ne doosre ko maar diya phir apni chonch se zameen khodkar gadha kiya aur mare hur kawwe ko usme dabakar ud gaya,to qaabeel ne bhi waise hi apne bhai ko zameen me dafn kar diya,haabeel ki qatl ki khabar sunkar hazrat aadam alaihissalam itne zyada ghumzada hue ki aap 100 saal tak muskuraye nahin phir maula ne aapko hazrat sheesh alaihissalam ki basharat di to aap muskuraye,qatl ka ye waqiya mangal ke din pesh aaya aur us waqt hazrate haabeel ki umr 20 saal aur qaabeel ki 25 saal aur hazrat aadam alaihissalam ki umr 125 saal thi

📕 Tazkiratul ambiya,safah 56-61
📕 Tafseer ruhul bayan,jild 1,safah 555
📕 Ajaybul quran,safah 95

  • Qatl se pahle qaabeel bahut khoobsurat tha magar jaise hi usne ye jurm kiya uska chehra siyah pad gaya aur aql bhi zaayal ho gayi,usko usi ke bete ne jo ki andha tha patthar maar maarkar halaak kar diya,uspar azaab ye hai ki usko pindli se ulta latkaya gaya hai aur uska munh suraj ki taraf hai aur suraj ke ghoomne ke saath saath wo bhi ghoomta rahta hai,aur qayamat ke jin poore jahannam ke azaab ka aadha hissa akele uspar daala jayega

📕 Tafseer ruhul bayan,jild 1,safah 556

  • Aapke wisaal se pahle zemeen par aapki aulaad ki tadaad 40000 pahunch chuki thi kuchh riwayto me 1 laakh bhi aata hai

📕 Tafseere nayimi,jild 1-4,safah 340-416

  • 2 nabi yaani hazrat sheesh alaihissalam aur hazrat idrees alaihissalam aapki zindagi me paida ho chuke the,hazrat idrees alaihissalam ko aapka 100 saal ka zamana mila magar nabi hone ka elaan aapne hazrat aadam alaihissalam ke wisaal ke 200 saal baad kiya

📕 Tafseere saavi,jild 3,safah 73

  • Aapki umr 1000 saal huyi

📕 Alitqaan,jild 2,safah 175
📕 Zarqaani,jild 1,safah 64

  • Magar hadise paak me aata hai ki aapki umr to 1000 saal thi par usme se aapne 40 saal hazrat daood alaihissalam ko de diye the to 960 saal aap zameen par rahe aur apni umr dekar aap bhool bhi gaye,jiske sabab bani insaan ko nisyaan ki bimari laahiq huyi

📕 Mishqat,jild 2,safah 400

  • Aapne itni muddat zameen par guzaari magar kabhi bhi aapne kunwe se paani nahin piya balki aap hamesha baarish ka paani hi piya karte the

📕 Tafseere azizi,jild 1,safah 172

  • Aapki qabre mubarak me ikhtilaf hai magar mashhoor yahi hai ki aapki qabr makka moazzama se taqriban 5 kilometer door maqame mina me jahan hajjaj log qurbani karte hain wahin par masjide khaif ke aas-paas hai,aapki namaze janaza hazrate jibreel alaihissalam ne padhayi aur 4 takbeere kahi gayi

📕 Tafseere nayimi,jild 1,safah 332
📕 Tazkiratul ambiya,safah 62
📕 Zarqaani,jild 1,safah 65

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