Fri. Jul 23rd, 2021

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*हिन्दी/hinglish*                                       *Wazayaf*

*हदीसे पाक में आता है कि इल्म फैलाने वाले के बराबर कोई आदमी सदक़ा नहीं कर सकता*

📕 क़ुर्बे मुस्तफा,सफह 100

* अपनी मर्ज़ी की जगह शादी करने के लिए हर नमाज़ के बाद 241 बार या अज़ीज़ू या जामेअू يا عزيز يا جامع अव्वल आखिर 11,11 बार दरूद शरीफ

📕 रूहानी इलाज,सफह 203

* कहीं सख्त आग लग गई हो तो उसे बुझाने के लिए सूरह वद्दुहा पढ़कर 7 कंकरियों पर दम करें कि हर कंकरी पर एक बार पढ़कर आग में फेंकता जाये,इन शा अल्लाह आग बुझ जायेगी

📕 मसाएलुल क़ुरान,सफह 287

* जो किसी मुसीबत ज़दा को देखकर ये दुआ الحمد لله اللذي عافاني مما ابتلاك به وفضلني على كثير ممن خلق تفضيلا अलहम्दु लिल्लाहिल लज़ी आअफ़ानी मिम्मब तलाका बिही वफ’द्दलानी अला कसीरिम मिम्मन खलाक़ा तफदी’ला पढ़ लेगा,इंशा अल्लाह खुद कभी उस मुसीबत में गिरफ्तार ना होगा मगर बुखार ज़ुकाम खुजली और आंखों के दर्द में ना पढ़ी जाए कि इन अमराज़ की हदीस मे बड़ी तारीफ आई है

📕 अलमलफूज़,हिस्सा 1,सफह 14

* जिस पर जादू किया गया हो उस पर 100 बार सूरह फलक़ और सूरह नास पढ़कर दम करें इं शा अल्लाह जादू का असर ज़ायल होगा

📕 जन्नती ज़ेवर,सफह 475

* हर नमाज़ के बाद इसके हमेशा पढ़ने से बेशुमार बरक़ते दीनो दुनिया की ज़ाहिर होंगी,अव्वल आखिर 3 बार दुरुदे पाक फिर 100 बार,बाद नमाज़े फज्र ‘या अज़ीज़ु या अल्लाहु’ बाद नमाज़े ज़ुहर ‘या करीमु या अल्लाहु’ बाद नमाज़े अस्र ‘या जब्बारु या अल्लाहु बाद नमाज़े मग़रिब ‘या सत्तारु या अल्लाहु’ बाद नमाज़े इशा ‘या ग़फ्फारु या अल्लाहु

ياعزيز يا الله
يا كريم يا الله
يا جبّار يا الله
يا ستّار يا الله
يا غفّار يا الله

📕 शजरये रज़वियह,सफह 24

* जो रोज़ाना 7 बार ‘अलबारिअु’ البارى पढ़ेगा उसे अज़ाबे कब्र ना होगा इं शा अल्लाह

📕 वज़ायफे रज़वियह,सफह 214

* मगर ये याद रखें जो शख्स नमाज़ ना पढ़े और अलग अलग कामों के लिये वज़ीफा पढ़ता रहे तो क़यामत के दिन उसका वज़ीफा उसके मुंह पर मार दिया जायेगा लिहाज़ा पहले नमाज़े पंजगाना की आदत डालें*

📕 फतावा रज़वियह,जिल्द 3,सफ़ह 82

* जो भी काम शुरू करें वो पूरा ना होता हो या किसी भी मुश्किल का हल ना निकलता हो तो बाद नमाज़े मग़रिब 1000 बार “या रशीदु” يا رشيدُ पढ़ें,इन शा अल्लाह उसका हल निकल आयेगा और अगर हमेशा पढ़ता रहे तो सारे जायज़ काम खुद बखुद पूरे होते जायेंगे और रोज़गार में भी खूब तरक़्क़ी होगी

📕 रूहानी इलाज,सफह 150

* जो कोई एक बार दुरूदे सआदत “अल्लाहुम्मा सल्ली अला सय्यदना व मौलाना मुहम्मदिन अदादा माफी इलमिल लाहि सलातन दा—इमातम बिदावामी मुल्किल लाह” اللهم صلى على سيدنا محمّد عدد مافى علم الله صلوة دآيمةً بداوام ملك الله पढ़ता है तो 6 लाख दुरूदे पाक का सवाब उसके नामये आमाल में लिखा जाता है

📕 खज़ीनये दुरूद शरीफ,सफह 234

* जो कोई सुबह और शाम को ये दुआ “अल्लाहुम्मा लकल हम्दु हम्दन दा–इमन मअ दवामिका व लकल हम्दु हम्दन खा-लिदन मअ खुलूदिका व लकल हम्दु हम्दल लामुन्तहा लहु दूना मशीय्यतिका व लकल हम्दु हम्दन इन्दा कुल्ली तरफति अैनिवं व तनफ्फुसी कुल्ली नफ्स” اللهم لك الحمد ححمدا دا~ىما مع دوامك ولك الحمد حمدا خالدا مع خلودك ولك الحمد حمدا اللآمنتهى له دون مشىتك ولك الحمد حمدا عند كل طرفة عين وتنفس كل نفس सिर्फ 1 बार पढ़ लेगा तो फज़ले रब्बी से दिनों रात इबादत करने वाले को जितना सवाब मिलता है इस दुआ के पढ़ लेने वाले को उतना सवाब मिल जायेगा इन शा अल्लाह,याद रखें कि आधी रात ढलने के बाद से सूरज निकलने तक सुबह है और दोपहर ढलने से ग़ुरूब आफताब तक शाम है

📕 वज़ायफे रज़वियह,सफह 234

* जो कोई हर नमाज़ के बाद पारा 19 सूरह फुरक़ान आयत नं0 74 “रब्बना हबलना मिन अज़वाजिना व ज़ुर्रीयातिना क़ुर्रता आय्युनिवं वजअलना लिल मुत्तक़ीना इमामा” ربنا هب لنا من ازواجنا وذريتنا قرة اعين واجعلنا للمتقينا اماما 1 बार पढ़ लिया करे तो उसके बीवी बच्चे सब ही दीनदार हो जायेंगे इन शा अल्लाह

📕 मसाएलुल क़ुरान,सफह 283

* जिनकी आंखों की रौशनी कमज़ोर हो गई हो वो पांचों नमाज़ों के बाद 11 बार “या नूरू” يا نورُ पढ़कर दोनों हाथों के पोरों पर दम करके आंखों पर रखें

📕 जन्नती ज़ेवर,सफह 476

* आमन्तु बिल्लाही व रसूलिही” آمنت بلله ورسوله पढ़ने से वस्वसे फौरन ही दूर हो जाते हैं

📕 अलमलफूज़,हिस्सा 1,सफह 71

* ऐसा कोई शख्स हो जिसका चेहरा देखने में अच्छा ना मालूम होता हो तो वो दिन में किसी भी वक़्त बा वुज़ू अव्वल आखिर 3,3 बार दुरूद शरीफ और 100 बार ये कलिमात पढ़े “अल्लाहु जमीलुन वयुहिब्बुल जमाल” الله جميلً ويحبّ الجمال इन शा अल्लाह उसका हुस्न बढ़ेगा

📕 रूहानी इलाज,सफह 156

* किसी को शदीद बुखार हो तो बिस्मिल्लाह शरीफ के साथ 1 सांस में 17 बार ये दुआ ” या नारू कूनी बरदौंव वसालामा يا نار كونى بردا وسلاما ” पढ़कर पानी में दम करके पिलाएं,इंशा अल्लाह बुखार में राहत होगी

* सर में अगर दर्द हो तो शहादत की ऊंगली से बिस्मिल्लाह शरीफ माथे पर लिख दिया जाए दर्द काफूर हो जायेगा

* जब गुस्सा आये तो फ़ौरन ” आऊज़ू बिल्लाही मिनश शैतानिर रजीम ” पढ़ें गुस्सा ठंडा हो जायेगा

* “अस्तग़फ़िरुल लाहल लज़ी लाइलाहा इल्ला हुवल हय्युल क़य्यूमू व आतूबू इलैहि استغفر الله الذى لااله الا هو الحى القيوم واتوب اليه” जो शख्स सोते वक़्त ये दुआ 3 बार पढ़ लेगा तो अगर उसके गुनाह दरख्तों के पत्तों या ज़मीन की रेत से भी ज़्यादा होंगे तब भी मौला तआला उसे बख्श देगा

📕 इस्लामी अखलाक़ो आदाब,सफह 80-108-214-257

* ईमान की हिफाज़त के लिए सुबह सूरज निकलने से पहले 41 बार ” या ह़य्यू या क़य्यूमू ला इलाहा इल्ला अन्ता ياحي يا قيوم لااله الا انت ” और सोते वक़्त सबसे आखिर में सूरह काफेरून पढ़ें

📕 अलमलफूज़,हिस्सा 2,सफह 103

* ग़रीब आदमी इस मुबारक नाम ” मुहम्मदुन ” को 400 बार रोज़ाना पढ़े तो मौला तआला उसे ग़नी कर देगा,अव्वल आखिर 11,11 बार दरूद शरीफ,और हर बार नामे अक़दस के साथ अगर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम भी कहता जाए तो सोने पर सुहागा

📕 वज़ायफे रज़वियह,सफह 227

* जो लोग गुनाह में उलझे हुए हैं और उन्हें अपने गुनाहों से तौबा करनी है तो वो अपने नफ्स को काबू में करने के लिए रात को सोते वक़्त अपने सीने पर हाथ रखकर “या मुमीतू” يا مميت पढ़ते पढ़ते सो जायें,इन शा अल्लाह कुछ ही दिनों में उसका नफ्स उसके काबू में होगा

📕 रूहानी इलाज,सफह 135

* जिन मियां बीवी में इत्तेहादो मुहब्बत ना रहती हो तो उनमें से कोई 1001 बार “या वदूदू” يا ودود पढ़कर चीनी या नमक पर दम करता जाए और यही खाने में इस्तेमाल किया जाए तो जो लोग भी इसे खायेंगे वो आपस में मुहब्बत से रहेंगे

📕 वज़ायफे रज़वियह,सफह 218

* जो कोई रोज़ाना 1000 बार दुरूद शरीफ पढ़ेगा तो वो उस वक़्त तक नहीं मरेगा जब तक कि अपनी जगह जन्नत में ना देख ले

📕 खज़ीनये दुरूद शरीफ,सफह 14

* जिन लड़कियों की शादी ना होती हो उनके लिए रोज़ाना 489 बार “या फत्ताहू या अल्लाहू” يا فتاح يا الله का विर्द किया जाए या वो खुद पढ़ें

हुज़ूर ताजुश्शरिया

* अगर ख्वाब में किसी मुर्दे का हाल देखना हो या उससे मुलाक़ात की ख्वाहिश हो तो जुमे की रात में 113 बार सूरह “अलहाकुमुत तकासुर” पढ़कर बगैर बात किये सो जायें,अगर एक बार में हाल मालूम ना हो तो 7 जुमा यही अमल जारी रखें,इं शा अल्लाह अगर पढ़ने में कोई कमी ना रही तो मक़सद हासिल होगा

📕 जन्नती ज़ेवर,सफह 474

* पथरी को रेज़ा रेज़ा करके निकालने के लिए सूरह “अलम नशरह” ज़ाफरान से चीनी की प्लेट पर लिखकर धोकर पियें

📕 मसाएलुल क़ुर्आन,सफह 284

* किसी भी वज़ीफे की कामयाबी नमाज़ की पाबन्दी पर मौक़ूफ है तो पहले नमाज़ शुरू करें फिर कोई वज़ीफा पढ़ें और हर वज़ीफे के अव्वल व आखिर में दुरूदे पाक शरीफ ज़रूर पढ़ें*

* जो बुध की रात जैसे कि आज बाद नमाजे इशा 2 रकात नमाज़ नफ़्ल पढ़े इस तरह कि पहली में सूरह फातिहा के बाद 10 बार सूरह फलक़ और दूसरी रकात में सूरह फातिहा के बाद 10 बार सूरह नास,तो 70000 फरिश्ते हर आसमान से उतरेंगे और क़यामत तक उसका सवाब लिखते रहेंगे

📕 ग़ुनियतुत तालेबीन,जिल्द 2,सफह 143

* जो कोई हर रात सूरह मुल्क शरीफ पढ़ता रहेगा उसे अज़ाबे क़ब्र ना होगा और उसकी बख्शिश हो जायेगी

📕 वज़ायफे रज़वियह,सफह 56

* जिसको पित्ती उछल आती हो वो दिन में तीन मर्तबा थोड़े पानी में चीनी घोलकर 11 बार “कुन फयाकून” पढ़कर दम करके पिये,22 दिन तक ऐसा करना है

📕 रूहानी इलाज,सफह 45

* हिचकियों को फौरन बंद करने के लिए लौंग बेहतरीन दवा है

📕 जन्नती ज़ेवर,सफह 439

* जो सुबह और शाम को 7 बार पढ़े “अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन नार” तो जहन्नम खुद दुआ करे कि मौला इसको मुझसे बचा

📕 अलवज़ीफतुल करीमा,सफह 16

* आलाहज़रत फरमाते हैं जिनको अक्सर परेशानी रहती हो तो वो लाहौल शरीफ कसरत से पढ़ें कि ये 69 बलाओं को दफ़ा करता है जिनमे सबसे आसान परेशानी है और पानी में 60 बार दम करके पिया भी करे

📕 अलमलफूज़,हिस्सा 1,सफह 63

* बाद नमाज़े इशा बावुज़ू नंगे सर ऐसी जगह खड़े होकर जहां सर और आसमान के बीच कोई चीज़ ना हो (छत पर) 500 बार पढ़ें या मुसब्बेबल असबाब अव्वल आखिर 11,11 बार दुरूद शरीफ,ग़ैब से रोज़ी का इंतज़ाम होगा और पहाड़ के बराबर भी अगर क़र्ज़ होगा तो अदा हो जायेगा,इंशा अल्लाह

📕 अलमलफूज़,हिस्सा 2,सफह 61

* जिसने अपनी सारी उम्र खुदा की नाफरमानी में गुज़ार दी माज़ अल्लाह और अब बुढ़ापे में तौबा करना चाहता है तो हर नमाज़े पंजगाना के बाद 100 बार या आखिरू يا اخر पढ़ा करे मौला ने चाहा तो उसका खातमा ईमान पर होगा और मौत की सख्तियों से निजात पायेगा

📕 वज़ायफे रज़वियह,सफह 222

* अगर किसी जायज़ रिश्ते में मुहब्बत ना हो तो 786 बार बिस्मिल्लाह शरीफ पढ़कर पानी पर दम करके पिलाएं तो दुश्मनी दोस्ती में बदल जायेगी इन शा अल्लाह,अगर एक बार में असर ना हो तो बेहतर है कि 40 रोज़ लगातार करें

📕 जन्नती ज़ेवर,सफह 450

* अगर कोई काम बनते बनते बिगड़ जाता हो या रुकावटें आती हो तो एक वक़्त मुकर्रर करके उसी वक़्त पर बावुज़ू मदीना शरीफ की जानिब रूख करके दो ज़ानु अदब से बैठकर 92 मर्तबा “या मुहम्मद” सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम का विर्द करें,हर काम बा आसानी होना शुरू हो जायेगा इन शा अल्लाह

📕 रूहानी इलाज जदीद,सफह 193

* जो लोग औलाद से महरूम हों तो वो लोग हर नमाज़ के बाद पारा 17 सूरह अंबिया की आयत न. 89 का ये हिस्सा रब्बी ला तज़रनी फरदौंव व अन्ता खैरुल वारिसीन رب لا تذرنى فردا وانت خير الوارثين 3 बार पढ़ें तो इन शा अल्लाह जल्द ही साहिबे औलाद हो जाएंगे

📕 मसाएलुल क़ुरान,सफह 282

* जो किसी महफिल से उठने पर 1 बार ये दुआ सुब्हानका अल्लाहुम्मा वबिहम्दिका अशहदु अल लाइलाहा इल्ला अन्ता अस्गग़फिरुका वआतूबू इलैका سبحانك اللهم وبحمدك اشهد ان لااله الا انت استغفرك واتوب اليك पढ़ लेगा तो जो भी नेक बातें की होगी वो मुहर लगाकर साबित कर दी जाएगी औत तमाम फिज़ूल बातें मिटा दी जाएगी

📕 अलमलफूज़,हिस्सा 4,सफह 18

* जो इम्तिहान में कामयाब होना चाहते हैं वो बाद नमाज़े इशा अव्वल आखिर 11,11 बार दरूद शरीफ और 300 बार अल मलिकुल क़ुद्दूस الملك القدوس पढ़कर दुआ करते रहें जब तक कि रिज़ल्ट ना आ जाये

📕 रूहानी इलाज,सफह 21

* किसी को शदीद बुखार हो तो बिस्मिल्लाह शरीफ के साथ 1 सांस में 17 बार ये दुआ ” या नारू कूनी बरदौंव वसालामा يا نار كونى بردا وسلاما ” पढ़कर पानी में दम करके पिलाएं,इंशा अल्लाह बुखार में राहत होगी

📕 इस्लामी अखलाक़ो आदाब,सफह 80

* ईमान की हिफाज़त के लिए सुबह सूरज निकलने से पहले 41 बार ” या ह़य्यू या क़य्यूमू ला इलाहा इल्ला अन्ता ياحي يا قيوم لااله الا انت ” और सोते वक़्त सबसे आखिर में सूरह काफेरून पढ़ें

📕 अलमलफूज़,हिस्सा 2,सफह 103

* ग़रीब आदमी इस मुबारक नाम ” मुहम्मदुन ” को 400 बार रोज़ाना पढ़े तो मौला तआला उसे ग़नी कर देगा,अव्वल आखिर 11,11 बार दरूद शरीफ,और हर बार नामे अक़दस के साथ अगर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम भी कहता जाए तो सोने पर सुहागा

📕 वज़ायफे रज़वियह,सफह 227

* रिज़्क़ के लिए रोज़ाना फज्र की सुन्नत व फर्ज़ के बीच 100 बार ये तस्बीह ‘सुब्हानल लाहि वबिहमदिही सुब्हानल लाहिल अज़ीम वबिहमदिही अस्तग़फिरुल्लाह’ سبحان الله وبحمده سبحان الله العظيم وبحمده استغفر الله पढ़ें अव्वल आखिर दुरूदे पाक 3,3 बार,जिस दिन सुन्नत व फर्ज़ के बीच ना पढ़ सकें तो सूरज निकलने से पहले तो पढ़ ही लें,इस तस्बीह के बारे में हदीसे पाक में आता है कि एक सहाबी हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम के पास तशरीफ लायें और अपनी ग़ुरबत की शिकायत की तो आप सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि तुम फरिश्तों की वो तस्बीह क्यों नहीं पढ़ते जिसकी बरकत से रोज़ी दी जाती है,वो सहाबी गए और एक हफ्ते के बाद फिर तशरीफ लाते हैं और फरमाते हैं कि या रसूल अल्लाह सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम मेरे पास दुनिया इस कसरत से आई है कि मैं हैरान हो गया हूं कि कहां उठाऊं और कहां रखूं

📕 अलमलफूज़,हिस्सा 1,सफह 63

* कोई किसी नौकरी पर लगा है अगर उसको ये डर है कि कहीं ये जॉब मुझसे छिन ना जाए या कोई रुकावट ना लगा दे तो रोज़ाना 100 बार या इमामुन يا امامُ‘ पढ़े अव्वल आखिर 3,3 बार दरूद शरीफ,जॉब बरक़रार रहेगी इन शा अल्लाह तआला

📕 रूहानी इलाज,सफह 193

* बहुत से लोग नमाज़ पढ़ते हैं मगर फिर उनसे छूट जाती है क्योंकि नमाज़ की मुहब्बत दिल में नहीं होती लिहाज़ा ऐसा अमल पढ़ा जाए कि नमाज़ की मुहब्बत दिल में पैदा हो,ये वज़ीफा मेरी अम्मी ने मुझे बचपन में बताया था जिसकी बदौलत मैने अपने दिल में नमाज़ के लिए बहुत मुहब्बत पाई इसका हवाला तो मुझे नहीं मिला मगर चुंकि ये मेरे अमल में रहा है और मैंने इसे बहुत फैज़ पाया है इसलिए बता रहा हूं,सबसे पहले तो करें कि जब भी जिस वक़्त की भी नमाज़ पढ़ने को मिल जाये पढ़ लीजिये कल पर बिल्कुल मत डालिए कि ये शैतानी वस्वसा होता है कि कल फज्र से शुरू करूंगा जुमा से शुरू करूंगा नहीं बल्कि इशा में ही ख्याल आया कि नमाज़ पढ़ ली जाए तो इशा ही पढ़ लीजिये कि बिल्कुल ना पढ़ने से तो एक वक़्त की पढ़ना बेहतर है,फिर जिस वक़्त की नमाज़ पढ़िए पूरी नमाज़ के बाद या अल्लाहु या रहमानु या रहीमु يا اللهُ يا رحمٰنُ يا رحيمُ ये पूरा एक हुआ इसको 21 बार पढ़ना है,अगर इसकी आदत डाल ली तो यक़ीन जानिये कि आपको सोचना नहीं पड़ेगा कि मुझको नमाज़ पढ़नी है बल्कि खुद ही आपका दिल नमाज़ की तरफ लगा रहेगा,हां बस हुरूफ की अदायगी सही रखें*

* अगर किसी पर पहाड़ के बराबर भी ग़म हो या दरिया के मिस्ल भी मुसीबत हो तो उसे चाहिए कि हर फर्ज़ नमाज़ के बाद दाहिना हाथ सर पर रखकर 1 बार ये दुआ पढ़ें بسم الله الرحمن الرحيم اللهم اذهب عنّى الّهَمَّ والحزن बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम अल्लाहुम्मा अज़हिब अन्निल हम्मा वलहुज़्न फिर उसके बाद ही कोई दूसरा वज़ीफा शुरू करें,इन शा अल्लाह कितना भी ग़म हो हरगिज़ उसका दिल मुतास्सिर ना होगा

📕 आमाले रज़ा,हिस्सा 1,सफह 110

* किसी मरीज़ पर يا سلامُ या सलामू 115 बार पढ़कर दम करें मौला ने चाहा तो शिफा होगी,बेहतर है कि जब तक शिफा ना मिले रोज़ाना पढ़कर दम करता रहे

📕 रुहानी इलाज,सफह 121

* दर्दे सर के लिए पेशानी पर शहादत की उंगली से बिस्मिल्लाह शरीफ लिखें इन शा अल्लाह दर्द काफूर होगा

📕 इस्लामी अखलाक़ो आदाब,सफह 108

* हर जायज़ काम के लिए* – रोज़ाना बावुज़ू होकर तन्हाई में 2 रकात नमाज़ तहयतुल वुज़ू पढ़ें उसके बाद *या लतीफु يا لطيف* 100 बार अव्वल आखिर दरूद शरीफ,मुहताजी दूर होगी कैसा भी मर्ज़ हो शिफा होगी लड़कियों की शादी ना होती हो तो रिश्ता आयेगा इन शा अल्लाह तआला

📕 आमाले रज़ा,हिस्सा 3,सफह 15

* ख्वाब में कुछ मालूम करने के लिए* – *सलामुन क़ौलम मिर रब्बिर रहीम سلام قولا من رب رحيم* बावुज़ू पाक बिस्तर पर लेटकर अव्वल आखिर 11-11 बार दरूद शरीफ और 300 बार पढ़कर सो जायें जो भी हल होगा ख्वाब में ज़ाहिर हो जायेगा

📕 आमाले रज़ा,हिस्सा 2,सफह 111

* किसी का अमल इसके बराबर नहीं* – तस्बीहे फातिमा यानि 33 बार *सुब्हान अल्लाही سبحان الله* 33 बार *अल्हम्दु लिल्लाही الحمد الله* 34 बार अल्लाहु अकबर الله اكبر* और एक बार *ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीका लहू लहुल मुल्कु वलाहुल हम्दु वहुवा अला कुल्ली शैईन क़दीर لا اله الا الله وحده لاشيك له له الملك وله الحمد وهو على كل شىء قدير* इसकी फज़ीलत का ये आलम है कि उस दिन किसी का भी अमल इसके बराबर बुलंद ना किया जायेगा या ये कि कोई दूसरा भी पढ़ ले

📕 वज़ायफे रज़वियह,सफह 235

* नौकरी या इंटरव्यू में कामयाबी के लिए* 100 मर्तबा दुरूदे पाक और 3 मर्तबा आयतल कुर्सी पढ़कर घर से निकले और रास्ते भर *या हय्यू या क़य्यूमु يا حي يا قيوم* पढता जाये जब तक कि इंटरव्यू की जगह पहुंच ना जाये,मौला ने चाहा तो ज़रूर कामयाब होगा

📕 रूहानी इलाज,सफह 195

* वहशते दुनिया और क़ब्र से निजात* – रोज़ाना जो कोई 100 बार *ला इलाहा इल्लल्लाहुल मलिकुल हक़्क़ुल मुबीन لا اله الا الله الملك الحق المبين* पड़ता रहेगा जो दुनिया में मुहताजी से और क़ब्र में खौफ से निजात पायेगा

📕 रिज़्क़ में बरकत,सफह 12

* कसरते एहतेलाम से निजात* – बुखारी शरीफ की रिवायत है कि हुज़ूर सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि मुझे उस मुक़द्दस हस्ती की कसम है जिसके कब्ज़ए क़ुदरत में मेरी जान है कि जिस राह से उमर गुज़रता है उस राह से शैतान हट जाता है लिहाज़ा जिस किसी को एहतेलाम (nightfaal) ज़यादा होता हो तो ऐसा शैतान के शर की वजह से होता है तो वो अपने सीने पर उंगली से عمر लिखकर सोया करे इन शा अल्लाह एहतेलाम से महफूज़ रहेगा

📕 शाने सहाबा,सफह 100

* अगर बीवी नाफरमान हो तो उसकी नाफरमानी को फरमा बरदारी में बदलने के लिए जब भी उसके सामने हों तो या वलिय्यु يا ولىّ का विर्द करता रहे इन शा अल्लाह कुछ ही दिनों में वो फरमा बरदार हो जाएगी

* अगर बहु नेक है और घर वाले उसे परेशान करते हैं तो वो हर नमाज़ के बाद 125 बार या क़ुद्दूसू या हमीदू يا قدوس يا حميد पढ़ा करे अव्वल आखिर 11,11 बार दुरूद शरीफ,इन शा अल्लाह सब उससे मुहब्बत करने लगेंगे

* अगर शौहर किसी ग़ैर औरत के चक्कर में फंस गया है तो बीवी हर नमाज़ के बाद 125 बार या सलामू या हादी يا سلام يا هادى अव्वल आखिर 9,9 बार दुरूद शरीफ,इन शा अल्लाह वो राहे रास्त पर आ जायेगा

📕 रूहानी इलाज,सफह 132-200-204

* जब कोई सख़्त मुसीबत में गिरफ़्तार हो और कोई हल ना निकलता हो तो आयते करीमा لا إله إلا أنت سبحانك إني كنت من الظالمين यानि का कसरत से विर्द किया जाए तो इन शा अल्लाह तआला उस मुश्किल से निजात पा जायेगा

📕 तज़किरातुल अम्बिया,सफह 200

* जो कोई सुबह फज्र से पहले अपने घर या दुकान के चारों कोनो पर 10-10 बार या रज़्ज़ाक़ु يا رزاق पढ़कर दम करे तो हरगिज़ वहां बे बरकती ना हो

📕 वज़ायफे रज़वियह,सफह 214

* फराखिये रिज़्क़ के लिए सूरह अलम नशरह का 81 बार रोज़ाना विर्द करना बहुत मुफीद है,हर बार बिस्मिल्लाह शरीफ पढ़े

📕 आमाले रज़ा,हिस्सा 3,सफह 78

* बच्चे अगर बहुत ज़िद्दी हों तो उनकी ज़िद को खत्म करने के लिए बाद नमाज़े ईशा 125 बार या करीमू या शहीदू يا كريم يا شهيد अव्वल आखिर 9-9 बार दुरूद शरीफ पढ़कर पानी पर दम करें और बच्चों को पिलायें,कम से कम 7 दिन और ज़्यादा 40 दिन

📕 रूहानी इलाज,सफह 207

* अगर पलंग या चारपाई में खटमल पड़ जाते हों तो उसके चारो पायों में अजवाइन कपड़े में रखकर बांध दें खटमल भाग जायेंगे

📕 जन्नती ज़ेवर,सफह 438

* जो कोई हमेशा वुज़ू के बाद आसमान की तरफ देखकर 1 बार सूरह इन्ना अन्ज़लना पढ़ लिया करे तो इन शा अल्लाह तआला कभी उसकी निगाह कमज़ोर नहीं होगी

📕 मसाइलुल क़ुर्आन,सफह 284

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* Hadise paak me aata hai ki ilm failane waale ke barabar koi aadmi sadqa nahin kar sakta*

📕 Qurbe mustafa,safah 100

* Apni marzi ki jagah shaadi karne ke liye har namaz ke baad 241 baar YA AZEEZO YA JAAME’O يا عزيز يا جامع awwal aakhir 11,11 baar durood sharif

📕 Ruhani ilaaj,safah 203

* Kahin sakht aag lag gayi ho to use bujhane ke liye suarh WADDOHA padhkar 7 kankariyon par dum kare ki har kankari par ek baar padhkar aag me phenkta jaaye,in sha ALLAH aag bujh jayegi

📕 Masayelul quran,safah 287

* Jo kisi musibat zada ko dekhkar ye dua ALHAMDU LILLAHIL LAZI AAFAANI MIMMAB TALAAKA BEHI WAFAD’DALANI ALA KASEERIM MIMMAN KHLAQA TAF’DEELA الحمد لله اللذي عافاني مما ابتلاك به وفضلني على كثير ممن خلق تفضيلا padh lega to in sha ALLAH khud kabhi us musibat me giraftaar nahin hoga magar bukhaar zukaam khujli wa aankhon ke dard me napdhi jaaye ki in amraaz ki hadeeso me bahut taareef aayi hai

📕 Almalfooz,hissa 1,safah 14

* Jis par jaadu kiya gaya ho us par 100 baar surah falaq wa 100 baar surah naas padhkar dum karen in sha ALLAH jaadu ka asar zaayal hoga

📕 Jannati zevar,safah 475

* Isko har namaz ke baad 100 baar hamesha padhte rahne se deeno duniya ki beshumar barkatein zaahir hongi awwal aakhir 3,3 baar durood sharif,fajr baad YA AZEEZO YA ALLAHU zuhar baad YA KAREEMO YA ALLAHO asr baad YA JABBAARO YA ALLAHO magrib baad YA SATTARO YA ALLAHO isha baad YA GAFFARO YA ALLAHO

ياعزيز يا الله
يا كريم يا الله
يا جبّار يا الله
يا ستّار يا الله
يا غفّار يا الله

📕 Shajraye razviyah,safah 24

* Jo rozana 7 baar AL BAARIO البارى padhega use azaabe qabr na hoga in sha ALLAH

📕 Solah surah,safah 214

*Magar ye yaad rakhen ki jo shakhs bhi namaz na padhe aur alag alag kaamo ke liye wazifa padhta rahe to qayamat ke din uska wazifa uske munh par maar diya jayega,lihaza pahle namaze panjgaan ki aadat daalein*

📕 Fatawa razviyah,jild 3,safah 82

* Jo bhi kaam shuru karen wo poora na hota ho ya kisi bhi mushkil ka hal na nikalta ho to baad namaze maghrib 1000 baar YA RASHEEDO padhen,in sha ALLAH uska hal nukal aayega aur agar hamesha padhta rahe saare jayaz kaam khud bakhud poore hote jayenge aur rozgaar me bhi khoob taraqqi hogi

📕 Ruhani ilaaj,safah 150

* Jo koi ek baar durude sa’adat ALLAHUMMA SALLE ALA SAYYADNA WA MAULANA MUHAMMADIN ADADA MAAFI ILMIL LAAHE SALAATAN DA—EMATAM BIDAWAAME MULKIL LAAH padhta hai to uske naamaye aamaal me 6 laakh durood sharif ka sawab likha jaata hai

📕 Khazinaye durood sharif,safah 234

* Jo koi subah aur shaam ko ye dua ALLAHUMMA LAKAL HAMDO HAMDAN DAA–EMAN MA DAWAMEKA WALAKAL HAMDO HAMDAN KHAALEDAN MA KHULUDEKA WALAKAL HAMDO HAMDAL LA MUNTAHA LAHU DOONA MASHIYYATEKA WA LAKAL HAMDO HAMDAN INDA KULLE TARFATE AINIV WATA NAFFOSE KULLE NAFS sirf 1 baar padh lega to fazle rabbi se din aur raat ibaadat karne waale ko jitna sawab milta hai is dua ke padhne waale ko utna sawab mil jayega,yaad rakhen ki aadhi raat dhalne ke baad suraj nikalne tak subah hai aur dopahar dhalne ke baad guroob aaftab tak shaam hai

📕 Solah surah,safah 234

* Jo koi har namaz ke baad paara 19 surah furqaan aayat 74 RABBANA HAB LANA MIN AZWAAJENA WA ZURRIYATENA QURRATA AAYONIV WAJ ALNA LIL MUTTAQEENA IMAAMA 1 baar padh liya kare to uske biwi bachche sab deendar ho jayenge in sha ALLAH

📕 Masayelul quran,safah 283

* Jinki aankhon ki raushni kamzor ho gayi ho wo paanchon namaz ke baad 11 baar YA NOORO padhkar dono haathon ke poro par dum karke aankhon par rakhen

📕 Jannati zevar,safah 476

* AAMANTO BILLAHE WA RASULEHI padhne se waswase fauran door ho jaate hain

📕 Almalfooz,hissa 1,safah 71

* Aisa koi shakhs ho jiska chehra dekhne me achchha na maloom hota ho to wo din me kisi bhi waqt ba wuzu aawal aakhir 3,3 baar durood sharif aur 100 baar ye kalimaat padhe ALLAHO JAMILUN WAYOHIBBUL JAMAAL in sha ALLAH uska husn badhega

📕 Ruhani ilaaj,safah 156

* Kisi ko shadeed bukhaar ho to bismillah sharif ke saath 1 saans me 17 baar ye dua ” ya naaro kooni bardanv wasalaama ” padhkar paani me dum karke pilayen,insha ALLAH bukhaar me raahat hogi

* Sar me agar dard ho to shahadat ki ungli se bismillah sharif maathe par likh diya jaaye dard kaafoor ho jayega

* Jab gussa aaye to fauran ” aaoozo billahe minash shaitanir rajeem ” padhe gussa thanda ho jayega

* Jo shakhs sote waqt ye dua ” Astagferul laahal lazi laailaha illa howal hayyul qayyumo wa aatubo ilaihe ” 3 baar padh lega to agar uske gunah darakhton ke patton ya zameen ki reit se bhi zyada honge tab bhi maula taala use bakhsh dega

📕 Islami akhlaqo aadaab,safah 80-108-214-257

* Imaan ki hifazat ke liye subah suraj nikalne se pahle 41 baar ” ya hayyo ya qayyumo laa ilaaha illa anta ” aur sote waqt sabse aakhir me surah kaaferun padhen

📕 Almalfooz,hissa 2,safah 103

* Gareeb aadmi is mubarak naam ” MUHAMMADUN ” ko 400 baar rozana padhe to maula taala use gani kar dega,awwal aakhir 11,11 baar durood sharif,aur har baar naame aqdas ke saath agar sallallaho taala alahi wasallam bhi kahta jaaye to sone par suhaga

📕 Solah surah,safah 227

* Jo log gunah me uljhe hue hain aur unhein apne gunahon se tauba karni hai to apne nafs ko kaabu me karne ke liye raat ko sote waqt apne seene par haath rakhkar ya MOMEETO padhte padhte so jaaye,in sha ALLAH kuchh hi dino me uska nafs uske kaabu me hoga

📕 Ruhani ilaj,safah 135

* Jin miya biwi me ittehado muhabbat na rahti ho to unme se koi 1001 baar “ya WADOODO” padhkar cheeni ya namak par dum karta jaaye aur yahi khaane me istemal kiya jaaye to log bhi ise khayenge wo aapas me muhabbat se rahenge

📕 Solah surah,safah 218

* Jo koi rozana 1000 baar durood sharif padhega to wo us waqt tak nahin marega jab tak ki wo apni jagah jannat me na dekh le

📕 Khazinaye durood sharif,safah 14

* Jin ladkiyon ki shaadi na hoti ho unke liye rozana 489 baar “ya FATTA’HO ya ALLAHO” ka wird kiya jaaye ya wo khud padhen

Huzur TAJ-US-SHARIYA

* Agar khwab me kisi murde ka haal dekhna ho ya usse mulaqat ki khwahish ho to jume ki raat me 113 baar surah “Alhakomut takasur” padhkar bagair baat kiye so jaayen,agar ek baar me haal maaloom na ho to 7 juma yahi amal jaari rakhen,insha ALLAH agar padhne me koi kami na rahi to maqsad haasil hoga

📕 Jannati zevar,safah 474

* Pathri ko reza reza karke nikaalne ke liye surah “Alam nashrah” zaafraan se cheeni ki plate par likhkar dhokar piyen

📕 Masaylul quran,safah 284

*Kisi bhi wazife ki kaamyabi namaz ki pabandi par mauqoof hai to pahle namaz shuru karen fir koi wazifa padhen aur har wazife ke awwal wa aakhir me durude paak sharif zaroor padhen*

* jo budh ki raat jaise ki aaj baad namaze isha 2 rakat namaz nafl padhe is tarah ki pahli me surah fatiha ke baad 10 baar surah falaq aur doosri rakat me surah fatiha ke baad 10 baar surah naas,to 70000 farishte har aasmaan se utrenge aur qayamat tak uska sawab likhte rahenge

📕 Guniyatut talebeen,jild 2,safah 143

* jo koi har raat surah mulk sharif padhta rahega use azabe qabr na hoga aur uski bakhshish ho jayegi

📕 Solah surah,safah 56

* jisko pitti uchhal aati ho wo din me teen martaba thode paani me cheeni gholkar 11 baar KUN FAYAKOON padhkar dum karke piye,22 din tak aisa karna hai

📕 Ruhani ilaj,safah 45

* hichkiyon ko fauran band karne ke liye laung behtareen dawa hai

📕 Jannati zevar,safah 439

* jo subah aur shaam ko 7 baar padhe ALLAHUMMA AJIRNI MINAN NAAR to jahannam khud dua kare ki maula isko mujhse bacha

📕 Alwazifatul karima,safah 16

* AALAHAZRAT farmate hain jinko aksar pareshani rahti ho to wo LAHAUL SHARIF kasrat se padhe ki ye 69 balaon ko dafa karti hai jinme sabse aasaan pareshani hai aur paani me 60 baar dum karke piya bhi kare

📕 Almalfooz,hissa 1,safah 63

* Baad namaze isha bawuzu nange sar aisi jagah khade hokar jahan sar aur aasman ke beech koi cheez na ho (chhat par) 500 baar padhen YA MUSABBEBAL ASBAAB awwal aakhir 11,11 baar durood sharif,gaib se rozi ka intezaam hoga aur pahaad ke barabar bhi agar qarz hoga to ada ho jayega,insha ALLAH

📕 Almalfooz,hissa 2,safah 61

1⃣ JIsne apni saari umr khuda ki nafarmani me guzaar di maaz ALLAH aur ab budhaape me tauba karna chahta hai to har namaze panjgaana ke baad 100 baar YA AAKHERO يا اخر padha kare maula ne chaha to uska khaatma imaan par hoga aur maut ki sakhtiyon se nijaat payega

📕 Solah surah,safah 222

2⃣ Agar kisi jayaz rishte me muhabbat na ho to 786 baar BISMILLAH sharif padhkar paani par dum karke pilayen to dushmani dosti me badal jayegi in sha ALLAH,agar ek baar me asar na ho to behtar hai ki 40 roz lagataar karen

📕 Jannati zevar,safah 450

3⃣ Agar koi kaam bante bante bigad jaata ho ya rukawtein aati ho to ek waqt muqarrar karke usi waqt bawuzu madina sharif ki jaanib rukh karke do zaanu adab se baithkar 92 martaba YA MUHAMMAD salllallaho taala alaihi wasallam ka wird karen,har kaam ba aasani hona shuru ho jayega in sha ALLAH

📕 Ruhaani ilaaj jadeed,safah 193

4⃣ Jo log aulaad se mahroom hon to wo log har namaz ke baad paara 17 surah ambiya ki aayat no. 89 ka ye hissa RABBI LA TAZARNI FARDAU’N WA ANTA KHAIRUL WAARESEEN رب لا تذرنى فردا وانت خير الوارثين 3 baar padhen to in sha ALLAH jald hi saahibe aulaad ho jaayenge

📕 Masayelul quran,safah 282

6⃣ Jo kisi mahfil se uthne par 1 baar ye dua SUBHANAKA ALLAHUMMA WABE HAMDEKA ASHHADO AL LAA ILAAHA ILLA ANTA ASTAGFEROKA WA AATOOBO ILAIKA سبحانك اللهم وبحمدك اشهد ان لااله الا انت استغفرك واتوب اليك padh lega to jo bhi nek baatein ki hogi wo muhar lagakar saabit kar di jayegi aut tamam fizool baatein mita di jayegi

📕 Almalfooz,hissa 4,safah 18

7⃣ Jo imtihaan me kaamyab hona chahte hain wo baad namaze isha awwal aakhir 11,11 baar durood sharif aur 300 baar AL MALEKUL QUDDOOS الملك القدوس padhkar dua karte rahen jab tak ki result na aa jaye

📕 Ruhaani ilaaj,safah 21

8⃣ * Kisi ko shadeed bukhaar ho to bismillah sharif ke saath 1 saans me 17 baar ye dua ” ya naaro kooni bardanv wasalaama ” padhkar paani me dum karke pilayen,insha ALLAH bukhaar me raahat hogi

📕 Islami akhlaqo aadaab,safah 80

9⃣ Imaan ki hifazat ke liye subah suraj nikalne se pahle 41 baar ” ya hayyo ya qayyumo laa ilaaha illa anta ” aur sote waqt sabse aakhir me surah kaaferun padhen

📕 Almalfooz,hissa 2,safah 103

🔟 Gareeb aadmi is mubarak naam “MUHAMMADUN” ko 400 baar rozana padhe to maula taala use gani kar dega,awwal aakhir 11,11 baar durood sharif,aur har baar naame aqdas ke saath agar sallallaho taala alahi wasallam bhi kahta jaaye to sone par suhaga

📕 Wazaife razviyah,safah 227

* Rizq ke liye rozana fajr ki sunnat wa farz ke beech 100 baar ye tasbeeh ‘SUBHANALLAHE WABEHAMDEHI SUBHANAL LAAHIL AZEEM WABEHAMDEHI ASTAGFERULLAH’ سبحان الله وبحمده سبحان الله العظيم وبحمده استغفر الله padhen awwal aakhir 3,3 baar durood paak sharif,jis din sunnat wa farz ke beech na padh saken to suraj nikalne se pahle to padh hi len,is tasbeeh ke baare me hadise paak me aata hai ki ek sahabi huzoor sallallaho taala alaihi wasallam ke paas tashreef laayen aur apni gurbat ki shikayat ki to aap sallallaho taala alaihi wasallam farmate hain ki tum farishton ki wo tasbeeh kyun nahin padhte jiski barkat se rozi di jaati hai,wo sahabi gaye aur ek hafte ke baad phir tashreef laate hain aur farmate hain ki ya RASOOL ALLAH sallallaho taala alaihi wasallam mere paas duniya is kasrat se aayi hai ki main hairaan ho gaya hoon ki kahan uthaun aur kahan rakhun

📕 Almalfooz,hissa 1,safah 63

* Koi kisi naukri par laga hai agar usko ye darr hai ki kahin ye job mujhse chhin na jaaye ya koi mere rukawat na laga de to rozana 100 baar YA IMAAMUN padhe awwal aakhir 3,3 baar durood sharif,job barkarar rahegi in sha ALLAH taala

📕 Ruhani ilaaj,safah 193

*Bahut se log namaz padhte hain magar phir unse chhoot jaati hai kyunki namaz ki muhabbat dil me nahin hoti lihaza aisa amal padha jaaye ki namaz ki muhabbat dil me paida ho,ye wazifa meri ammi ne mujhe bachpan me bataya tha jiski badaulat main namazi bana iska hawala to mujhe nahin mila bagar chunki ye mere amal me raha hai aur maine isse bahut faiz paaya hai isliye bata raha hoon,jab bhi jis waqt ki bhi namaz padhne ko mil jaaye padh lijiye kal par bilkul mat daaliye ki shaitani waswasa hota hai ki fajr se shuru karunga juma se shuru karunga nahin balki isha me hi dil aaya ki namaz padh li jaaye to isha hi padh lijiye,phir jis waqt ki namaz padhiye poori namaz ke baad YA ALLAHO YA RAHMAANO YA RAHEEMO ye poora ek hua isko 21 baar padhna hai,agar iski aadat daal li to yaqeen jaaniye ki aapko sochna nahin padega ki mujhko namaz padhni hai balki khud hi aapka dil namaz ki taraf laga rahega,haan bas horoof ki adaygi sahi rakhen*

* Agar kisi par pahaad ke barabar bhi ghum ho ya dariya ke misl bhi musibat ho to use chahiye ki har farz namaz ke baad daahina haath sar par rakhkar 1 baar ye dua padhen BISMILLAHIR RAHMAANIR RAHEEM ALLAHUMMA AZHIB ANIIL HAMMA WALHUZNA phir uske baad koi doosra wazifa shuru karen,in sha ALLAH kitna bhi ghum ho hargiz uska dil mutassir na hoga

Aamale raza,hissa 1,safah 110

* Kisi mareez par YA SALAAMO 115 baar padhkar dum karen maula ne chaha to shifa hogi,behtar hai ki jab tak shifa na mile rozana dum karta rahe

Ruhani ilaaj,safah 121

* Darde sar ke liye peshani par shahadat ki ungli se bismillah sharif likhen in sha ALLAH dard kafoor hoga

Islami akhlaqo aadab,safah 108

*Har jayaz kaam ke liye* – Rozana bawuzu hokar tanhayi me 2 rakat namaz tahyatul wuzu padhen uske baad *YA LATEEFU يا لطيف* 100 baar awwal aakhir durood sharif,muhtaji door hogi kaisa bhi marz ho shifa hogi ladkiyon ki shaadi na hoti ho to rishta aayega in sha ALLAH taa’la

📕 Aamale raza,hissa 3,safah 15

*Khwab me kuchh maloom karne ke liye* – Bawuzu paak bister par leitkar awwal aakhir 11-11 baar durood sharif aur 300 baar *SALAMUN QAULAM MIR RABBIR RAHEEM سلام قولا من رب رحيم* padhkar so jayein jo bhi hal hoga khwab me zaahir ho jayega

📕 Aamale raza,hissa 2,safah 110

*Kisi ka amal iske barabar nahin* – Tasbeehe fatima yaani 33 baar *SUBHAAN ALLAHI سبحان الله* 33 baar *ALHAMDU LILLAHI الحمد الله* 34 baar ALLAHU AKBAR الله اكبر* aur ek baar *LAA ILAHA ILLALLAHU WAHDAHU LA SHARIKA LAHU LAHUL MULKU WALAHUL HAMDU WAHUWA ALA KULLI SHAIYIN QADEER لا اله الا الله وحده لاشيك له له الملك وله الحمد وهو على كل شىء قدير* iski fazilat ka ye aalam hai ki us din kisi ka bhi amal iske barabar buland na kiya jayega ya ye ki koi doosra bhi padh le

📕 Wazaife razviyah,safah 235

*Naukri ya interview me kaamyabi ke liye* 100 martaba durude paak aur 3 martaba aaytal kursi padhkar ghar se nikle aur raaste bhar *YA HAYYU YA QAYYUMU يا حي يا قيوم* padhta jaaye jab tak ki interview ki jagah pahunch na jaaye,maula ne chaha to zaroor kaamyab hoga

📕 Ruhani ilaaj,safah 195

*Wahshate duniya aur qabr se nijaat* – Rozana jo koi 100 baar *LAA ILAAHA ILLALLAHUL MALIKUL HAQQUL MUBEEN لا اله الا الله الملك الحق المبين* padta rahega jo duniya me muhtaaji se aur qabr me khauff se nijaat payega

📕 Rizq me barkat,safah 12

*Kasrate ehtelaam se nijaat* – Bukhari sharif ki riwayat hai ki huzoor sallallahu taala alaihi wasallam irshad farmate hain ki mujhe us muqaddas hasti ki kasam hai jiske qazaye qudrat me meri jaan hai ki jis raah se UMAR guzarta hai us raah se shaitan hat jaata hai lihaza jis kisi ko ehtelam (nightfaal) zyada hota ho to aisa shaitan ke shar ki wajah se hota hai to wo apne seene par ungli se عمر likhkar soya kare in sha ALLAH ehtelam se mahfooz rahega

📕 Shaane sahaba,safah 100

* Agar biwi nafarman ho to uski nafarmani ko farma bardaari me badalne ke liye jab bhi uske saamne hon to YA WALIYYO يا ولىّ ka wird karta rahe in sha ALLAH kucch hi dino me wo farma bardaar ho jayegi

* Agar bahu neik hai aur ghar waale use pareshan karte hain to wo har namaz ke baad 125 baar YA QUDDUSO YA HAMEEDO يا قدوس يا حميد padha kare awwal aakhir 11,11 baar durood sharif,in sha ALLAH sab usse muhabbat karne lagenge

* Agar shauhar kisi gair aurat ke chakkar me phans gaya hai to biwi har namaz ke baad 125 baar YA SALAAMO YA HAADI يا سلام يا هادى awwal aakhir 9,9 baar durood sharif,In sha ALLAH wo raahe raast par aa jayega

📕 Ruhani ilaaj,safah 132-200-204

*Jab koi sakht musibat me giraftaar ho aur koi hal na nikalta ho to aayte kareema ka kasrat se wird kiya jaaye to in sha ALLAH us mushkil se nijaat pa jayega

📕 Tazkiratul ambiya,safah 200

*Jo koi subah fajr se pahle apne ghar ya dukaan ke chaaro kono par 10-10 baar YA RAZZAQU padhkar dum kare to hargiz wahan be barkati na ho

📕 Wazayfe razviyah,safah 214

*Farakhiye rizq ke liye surah Alam Nashrah ka 81 baar rozana wird karna bahut mufeed hai,har baar bismillah sharif padhe

📕 Aamale raza,hissa 3,safah 78

*Bachche agar bahut ziidi hon to unki zid ko khatm karne ke liye baad namaze isha 125 baar YA KAREEMU YA SHAHEEDU awwal aakhir 9-9 baar durood sharif padhkar paani par dum karen aur bachchon ko pilayein,kam se kam 7 din aur zyada 40 din

📕 Ruhani ilaaj,safah 207

*Agar palang ya chaarpayi me khatmal pad jaate hon to uske chaaro paayo me ajwayin kapde me rakhkar baandh dein khatmal bhaag jayenge

📕 Jannati zevar,safah 438

*Jo koi hamesha wuzu ke baad aasman ki taraf dekhkar 1 baar surah Inna Anzalna padh liya kare to in sha ALLAH kabhi uski nigaah kamzor nahin hogi

📕 Masayelul quran,safah 284

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