Tue. Jun 15th, 2021

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*हिन्दी/hinglish*                   *मसाइले रोज़ा*

 

*मसअला* – भूल कर खाने पीने या जिमआ करने से रोज़ा नहीं टूटेगा

📕 बहारे शरीअत,हिस्सा 5,सफह 112

*मसअला* – बिला कस्द हलक में मक्खी धुआं गर्दो गुबार कुछ भी गया रोज़ा नहीं टूटेगा

📕 बहारे शरीअत,हिस्सा 5,सफह 112

*मसअला* – बाल या दाढ़ी में तेल लगाने से या सुरमा लगाने से या खुशबू सूंघने से रोज़ा नहीं टूटता अगर चे सुरमे का रंग थूक में दिखाई भी दे तब भी नहीं

📕 बहारे शरीअत,हिस्सा 5,सफह 113

*मसअला* – कान में पानी जाने से तो रोज़ा नहीं टूटा मगर तेल चला गया या जानबूझकर डाला तो टूट जायेगा

📕 बहारे शरीअत,हिस्सा 5,सफह 117

*मसअला* – एहतेलाम यानि नाइट फाल हुआ तो रोज़ा नहीं टूटा मगर बीवी को चूमा और इंजाल हो गया तो रोज़ा टूट गया युंहि हाथ से मनी निकालने से भी रोज़ा टूट जायेगा

📕 बहारे शरीअत,हिस्सा 5,सफह 117

*मसअला* – तिल या तिल के बराबर कोई भी चीज़ चबाकर निगल गया और मज़ा हलक में महसूस ना हुआ तो रोज़ा नहीं टूटा और अगर मज़ा महसूस हुआ या बगैर चबाये निगल गया तो टूट गया और अब क़ज़ा के साथ कफ्फारह भी वाजिब है

📕 बहारे शरीअत,हिस्सा 5,सफह 114,122

*मसअला* – आंसू मुंह में गया और हलक़ से उतर गया तो अगर 1-2 क़तरे हैं तो रोज़ा ना गया लेकिन पूरे मुंह में नमकीनी महसूस हुई तो टूट गया

📕 बहारे शरीअत,हिस्सा 5,सफह 117

*मसअला* – बिला इख्तियार उलटी हो गयी तो चाहे मुंह भरकर ही क्यों ना हो रोज़ा नहीं टूटेगा

📕 फतावा आलमगीरी,जिल्द 1,सफह 190
📕 बहारे शरीअत,हिस्सा 5,सफह 121

*मसअला* – कुल्ली करने में पानी हलक़ से नीचे उतरा या नाक से पानी चढ़ाने में दिमाग तक पहुंच गया अगर रोज़ा होना याद था तो टूट गया वरना नहीं

📕 बहारे शरीअत,हिस्सा 5,सफह 117

*मसअला* – पान,तम्बाकू,सिगरेट,बीड़ी,हुक्का खाने पीने से रोज़ा टूट जायेगा

📕 बहारे शरीअत,हिस्सा 5,सफह 116

*मसअला* – जानबूझकर अगरबत्ती का धुआं खींचा या नाक से दवा चढ़ाई या कसदन कुछ भी निगल गया तो रोज़ा टूट गया

📕 बहारे शरीअत,हिस्सा 5,सफह 113,114,117

*मसअला* – इंजेक्शन चाहे गोश्त में लगे या नस में रोज़ा नहीं टूटेगा मगर उसमें अलकोहल होता है इसलिए जितना हो सके बचा जाये

📕 फतावा अफज़लुल मदारिस,सफह 88

*मसअला* – पूरा दिन नापाक रहने से रोज़ा नहीं जाता मगर जानबूझकर 1 वक़्त की नमाज़ खो देना हराम है

📕 बहारे शरीअत,हिस्सा 5,सफह 113

*मसअला* – झूट,चुगली,ग़ीबत,गाली गलौच,बद नज़री व दीगर गुनाह के कामों से रोज़ा मकरूह होता है लेकिन टूटेगा नहीं

📕 जन्नती ज़ेवर,सफह 264

*मसअला* – रोज़ा तोड़ने का कफ्फारह उस वक़्त है जबकि नियत रात से की हो अगर सूरज निकलने के बाद नियत की तो सिर्फ क़ज़ा है कफ्फारह नहीं

📕 बहारे शरीअत,हिस्सा 5,सफह 120

*मसअला* – कफ्फारये रोज़ा ये है कि लगातार 60 रोज़े रखे बीच में अगर 1 भी छूटा तो फिर 60 रखना पड़ेगा या 60 मिस्कीन को दोनों वक़्त पेट भर खाना खिलाये या 1 ही फकीर को दोनों वक़्त 60 दिन तक खाना खिलाये या इसके बराबर रक़म सदक़ा करे

📕 बहारे शरीअत,हिस्सा 5,सफह 123

*मसअला* – मुबालग़े के साथ इस्तिंजा किया और हकना रखने की जगह तक पानी पहुंच गया रोज़ा टूट गया

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 5,सफह 116

*ⓩ पाखाने के सुर्ख मक़ाम तक पानी पहुंचा तो रोज़ा टूट जायेगा लिहाज़ा बड़ा इस्तिंजा करने में इस बात का ख्याल रखें कि फ़ारिग होने के बाद जब मक़ाम धुलना हो तो चंद सिकंड के लिये सांस को रोक लिया जाये ताकि मक़ाम बंद हो जाये अब जल्दी जल्दी धोकर पानी पूरी तरह से पोंछ लिया जाये क्योंकि अगर पानी के क़तरे वहां रह गये और खड़े होने में वो क़तरे अंदर चले गये तो रोज़ा टूट जायेगा,इसीलिए आलाहज़रत अज़ीमुल बरकत रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि रमज़ान भर बैतुल खला एक कपड़ा साथ लेकर जायें जिससे कि आज़ा के पानी को खड़े होने से पहले सुखा सकें*

*मसअला* – औरत का बोसा लिया मगर इंज़ाल ना हुआ तो रोज़ा नहीं टूटा युंही अगर औरत सामने हैं और जिमअ के ख्याल से ही इंज़ाल हो गया तब भी रोज़ा नहीं टूटा

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 5,सफह 113

*मसअला* – औरत ने मर्द को छुआ और मर्द को इंज़ाल हो गया रोज़ा ना टूटा और मर्द ने औरत को कपड़े के ऊपर से छुआ और उसके बदन की गर्मी महसूस ना हुई तो अगर इंज़ाल हो भी गया तब भी रोज़ा ना टूटा

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 5,सफह 117

*मसअला* – औरत ने मर्द को सोहबत करने पर मजबूर किया तो औरत पर क़ज़ा के साथ कफ्फारह भी वाजिब है मर्द पर सिर्फ क़ज़ा

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 5,सफह 122

*मसअला* – औरत को मुयय्यन तारीख पर हैज़ आता था आज हैज़ आने का दिन था उसने कस्दन रोज़ा तोड़ दिया मगर हैज़ ना आया तो कफ्फारह नहीं सिर्फ क़ज़ा करेगी युंही सुबह होने के बाद पाक हुई और नियत कर ली तो आज का रोज़ा नहीं होगा

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 5,सफह 123/119

*मसअला* – कोई चीज़ खरीदी और चखना ज़रूरी है कि अगर ना चखेगा तो नुकसान होगा तो इजाज़त है कि चख ले युंही शौहर बद मिज़ाज है कि नमक वगैरह की कमी बेशी पर चीखता चिल्लाता है तो औरत को हुक्म है कि नमक चख ले मगर चखने से मुराद ये है कि ज़बान पर रखकर मज़ा महसूस करके फौरन थूक दे वरना अगर निगल लिया तो रोज़ा जाता रहा बल्कि अगर शरायत पाये गये तो कफ्फारह भी लाज़िम होगा

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 5,सफह 125

*मसअला* – रमज़ान के दिनों में ऐसा काम करना जायज़ नहीं जिससे रोज़ा ना रख सके बल्कि हुक्म ये है कि अगर रोज़ा रखेगा और कमज़ोरी महसूस होगी और खड़े होकर नमाज़ ना पढ़ सकेगा तो भी रोज़ा रखे और बैठ कर नमाज़ पढ़े लेकिन ये तब ही है जब कि बिल्कुल ही खड़ा ना हो सके वरना बैठकर नमाज़ ना होगी

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 5,सफह 126

*ⓩ मगर मआज़ अल्लाह आज की अवाम का ख्याल तो ये है कि रमज़ान इबादत के लिए नहीं बल्कि कमाने के लिए आता है 10 घंटा काम करने वाला 12 घंटे काम करता है 12 घंटे वाला 16 घंटा और कुछ तो रातो दिन पैसा कमाने में जुट जाते हैं जबकि हुक्म तो ये है कि नान-बाई मजदूर और हर मेहनत कश आदमी सिर्फ आधे दिन ही काम करे और आधे दिन आराम करे ताकि रोज़ा रख सके,मगर मआज़ अल्लाह सुम्मा मआज़ अल्लाह आजके नाम निहाद मुसलमानो को ना तो रोज़े की खबर है और ना नमाज़ की फिक्र दिन भर उसी तरह खाना पीना जैसे कि कोई बात ही नहीं और उस पर तुर्रा ये कि हम मुसलमान हैं जन्नती हैं अगर दीन पर बात आई तो जान दे देंगे सर कटा देंगे अरे जिन कमबख़्तों से दिन भर भूखा प्यासा नहीं रहा जाता वो गर्दन क्या खाक कटायेंगे,मौला ऐसों को हिदायत अता फरमाये*

*मसअला* – दांतों में कोई चीज़ फंसी रह गयी तो अगर वो बगैर थूक की मदद से हलक़ से नीचे उतर सकती है और निगल गया तो रोज़ा टूट गया और इतनी खफ़ीफ़ है कि थूक के साथ ही उतर सकती है और निगला तो नहीं टूटा युंही मुंह से खून निकला और हलक़ से उतरा तो अगर मज़ा महसूस हुआ तो रोज़ा टूट गया और अगर खून कम था या मज़ा महसूस ना हुआ तो नहीं टूटा

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 5,सफह 116

*मसअला* – डोरा बट रहा था बार बार तर करने के लिए मुंह से गुज़ारा तो अगर उसकी रंगत या मज़ा महसूस ना हुआ तो रोज़ा नहीं गया लेकिन डोरे की रतूबत अगर थूक के ज़रिये निगला तो रोज़ा टूट गया

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 5,सफह 117

*मसअला* – ये गुमान था कि अभी सुबह नहीं हुई और खाया पिया या जिमअ किया और बाद को मालूम हुआ कि सुबह हो चुकी थी या किसी ने जबरन खिलाया तो इन सूरतों में सिर्फ क़ज़ा है कफ़्फ़ारह नहीं

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 5,सफह 118

*मसअला* – नाइटफॉल हुआ और उसे मालूम था कि रोज़ा नहीं टूटा फिर उसके बाद खाया पिया तो अब कफ्फारह लाज़िम है

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 5,सफह 121

*मसअला* – अगर किसी का रोज़ा गलती से टूट जाए तो फिर भी उसे मग़रिब तक कुछ भी खाना पीना जायज़ नहीं है पूरा दिन मिस्ल रोज़े के ही गुज़ारना वाजिब है युंही जो शख्स रमज़ान में खुले आम खाये पिये हुक्म है कि उसे क़त्ल किया जाये

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 5,सफह 118/119

*मसअला* – रोज़ेदार वुज़ू में कुल्ली करने और नाक में पानी चढ़ाने में मुबालग़ा ना करे

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 5,सफह 126

*ⓩ मतलब ये कि इतना पानी मुंह में ना भर ले कि हलक़ तक पहुंच जाये या नाक में इतना ना चढ़ाये कि दिमाग़ तक पहुंच जाये वरना रोज़ा टूट जायेगा,एक मसअला ये भी ज़हन में रखें कि अगर कोई रात को जुनुब हुआ यानि ग़ुस्ल फर्ज़ हुआ तो बेहतर है कि सहरी के वक़्त ही ग़ुस्ल करले और अगर नहीं किया यानि वक़्ते सहर खत्म हो गया तो अब ग़ुस्ल के 3 फरायज़ में से 2 उस पर से साकित हो गया यानि कुल्ली इस तरह करना कि हलक़ तक पानी पहुंच जाये और नाक की नर्म हड्डी तक पानी चढ़ाना ये दोनों माफ है अब बस सर से लेकर पैर तक एक बाल बराबर भी सूखा ना रहने पाये इस तरह पानी बहाले पाक हो जायेगा*

*मसअला* – सहरी खाने में देर करना मुस्तहब है मगर इतनी देर ना करें कि वक़्ते सहर ही खत्म हो जाये युंही अफ्तार में जल्दी करना भी मुस्तहब है मगर इतनी जल्दी भी ना हो कि सूरज ही ग़ुरूब ना हुआ हो

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 5,सफह 126

*ⓩ बाज़ लोग अज़ान को ही खत्मे सहर समझते हैं ये उनकी गलत फहमी है मसलन आज इलाहाबाद में खत्मे सहर 3:46 पर था तो कम से कम एहतियातन 3 मिनट पहले यानि 3:43 पर ही खाना पीना छोड़ दें युंही अगर फज्र पढ़नी हो तो कम से कम एहतियातन 3 मिनट और जोड़ दें यानि 3:49 पर फज्र पढ़ सकते हैं,अगर खत्मे सहर के बाद अगर एक बूंद पानी या एक दाना भी मुंह में डाला तो रोज़ा शुरू ही नहीं होगा अगर चे अभी अज़ान हुई हो या न हुई हो अगर चे वो नियत भी करले और दिन भर मिस्ल रोज़ा भूखा प्यासा भी रहे,लिहाज़ा वक़्त का लिहाज़ करें*

*मसअला* – मिस्वाक करना सुन्नत है अगर चे खुश्क हो या पानी से तर हो अगर चे हलक़ में उसकी कड़वाहट महसूस भी होती हो

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 5,सफह 125

*मसअला* – रोज़े की हालत में मियां बीवी का एक दूसरे के बदन को छूना चूमना गले लगाना मकरूह है अगर बगैर सोहबत किये भी इंज़ाल हुआ तो रोज़ा टूट जायेगा और सोहबत की तो कफ्फारह वाजिब

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 5,सफह 125

*मसअला* – अफ्तार के वक़्त जो दुआ पढ़ी जाती है वो एक दो लुक़्मा खाने बाद ही पढ़ी जाये बिस्मिल्लाह शरीफ के साथ रोज़ा खोलें फिर दुआ पढ़ें

📕 फतावा रज़वियह,जिल्द 1,सफह 13

*मसअला* – शरई उज़्र की वजह से रोज़ा ना रखने की इजाज़त है बाद रमज़ान रोज़ों की कज़ा करे,ये शरई उज़्र हैं 1. बीमारी 2. सफर 3. औरत को हमल हो या दूध पिलाने की मुद्दत में हो 4. सख्त बुढ़ापा 5. बेहद कमज़ोरी 6. जान जाने का डर

📕 दुर्रे मुख्तार,जिल्द 2,सफह 115
📕 बहारे शरियत,हिस्सा 5,सफह 130

*मसअला* – इनमे से शैखे फानी यानि बहुत ज्यादा बूढ़ा और ऐसा बीमार जिसके ठीक होने की उम्मीद ना हो वो लोग अगर रोज़ा ना रख सकें तो उन्हें हर रोज़े के बदले 2 kg 47 ग्राम गेंहू की कीमत यानि 60 rs. फिदिया अदा करना होगा

📕 दुर्रे मुख्तार,जिल्द 2,सफह 119

*मसअला* – शरई उज़्र की वजह से रोज़ा ना रखा और फिदिया देता रहा मगर अगला रमजान आने से पहले उसका उज़्र जाता रहा तो अब रोज़ो की क़ज़ा फर्ज़ है उसके सारे फिदिए नफ्ल हो गए

📕 दुर्रे मुख्तार,जिल्द 2,सफह 115
📕 बहारे शरियत,हिस्सा 5,सफह 133

*ⓩ जिन लोगों को शरई उज़्र की वजह से रोज़ा ना रखने की मोहलत है उन्हें भी अलानिया खाने पीने की इजाज़त नहीं है युंहि जिन लोगो का रोज़ा किसी गलती की वजह से टूट गया है उन्हे भी मग़रिब तक कुछ भी खाने पीने कि इजाज़त नहीं है लिहाज़ा इसका ख्याल रखें*

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*ZEBNEWS Charitable Trust*
*Sadqaye jaariya@30rs. p/m*
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*MASLA* – Bhool kar khaane peene ya jima karne se roza nahin tootega

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 112

*MASLA* – Bila kasd halaq me makkhi ya dhuwan ya gardo gubaar kuchh bhi gaya to roza nahin tootega

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 112

*MASLA* – Baal ya daadhi me teil lagaane se ya surma lagaane se ya khushbu soonghne se roza nahin tootta agar che thook me surme ka rang dikhayi de tab bhi nahin tootega

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 113

*MASLA* – Kaan me paani jaane se roza nahin toota magar teil chala gaya ya jaanbujhkar daala to toot gaya

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 117

*MASLA* – Ehtelam yaani night faal hua to roza nahin toota magar biwi ko chooma aur inzaal ho gaya ro toot gaya yunhi haath se mani nikaalne se bhi roza toot jayega

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 117

*MASLA* – Til ya til ke barabar koi bhi cheez chabakar nigal gaya aur maza halaq me mahsoos na hua to roza nahin toota aur agar maza mahsoos hua ya bagair chabaye nigal gaya to toot gaya ab qaza ke saath kaffarah bhi waajib hoga

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 114-122

*MASLA* – Aansu munh me gaya aur halaq se utra to agar ek do katre hain to roza na gaya aur agar poore munh me namkeeni mahsoos ho gayi to toot gaya

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 117

*MASLA* – Bila ikhtiyar ulti ho gayi to chahe munh bharkar hi kyun na ho roza nahin tootega

📕 Fatawa aalamgiri,jild 1,safah 190
📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 121

*MASLA* – Kulli karne me paani halaq se neeche utra ya naak me paani chadhane me dimaag tak pahunch gaya to agar yaad nahin tha ki roza hai to nahin toota aur yaad tha to toot gaya

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 117

*MASLA* – Paan tambaaku beedi sigrate hukka ye sab khaane peene se roza toot jayega

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 116

*MASLA* – Jaanbujhkar agarbatti ka dhuwan kheencha na naak se dawa chadhayi ya kuchh bhi nigal gaya to roza toot gaya

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 113-14-17

*MASLA* – Injection chahe gosht me lage ya nas me roza nahin tootega magar chunki usme alcohal hota hai isliye jitna ho sake bacha jaaye

📕 Fatawa afzalul madaris,safah 88

*MASLA* – Poora din naapak raha roza to ho gaya magar jaangujhkar ek waqt ki namaz kho dena haraam hai

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 113

*MASLA* – Jhoot chugli geebat gaali galauch bad nazri wa deegar gunaho se roza makruh hota hai magar tootega nahin

📕 jannati zevar,safah 264

*MASLA* – Roza todne ka kaffarah us waqt hai jab ki niyat raat se hi ki ho agar suraj nikalne ke baad niyat ki to sirf qaza hai kaffarah nahin

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 120

*MASLA* – Kaffaraye roza ye hai ki lagatar 60 roze rakhe agar beech me ek bhi chhoot gaya to phir se 60 roze rakhna hoga ya 60 miskeen ko dono waqt pet bharkar khaana khilaye ya ek hi fakeer ko dono waqt 60 din tak khaana khilaye ya iske barabar rakam sadqa kare

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 123

*MASLA* – Mubaalge ke saath istinja kiya aur haqna rakhne ki jagah tak paani pahunch gaya roza toot gaya

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 116

*ⓩ pakhane ke surk maqaam tak paani pahuncha to roza toot jayega lihaza bada istinja karne me is baat ka khayal rakhen ki faarig hone ke baad jab maqaam dhulna ho to saans ko rok liya jaaye taaki maqaam bund ho jaaye ab jaldi jaldi dhokar paani poori tarah se pochh liya jaaye kyunki agar paani ke qatre wahan rah gaye aur khade hone me wo qatre andar chale gaye to roza toot jayega,isiliye Aalahazrat azimul barkat raziyallahu taala anhu farmate hain ki ramzan bhar baitul khala ek kapda saath lekar jaaye jisse ke aaza ke paani ko khade hone se pahle sukha sake*

*MASLA* – Aurat ka bosa liya magar inzaal na hua to roza nahin toota yunhi agar aurat saamne hain aur jima ke khayal se hi inzaal ho gaya tab bhi roza nahin toota

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 113

*MASLA* – Aurat ne mard ko chhua aur mard ko inzaal ho gaya roza na toota aur mard ne aurat ko kapde ke oopar se chhua aur uske badan ki garmi mahsoos na huyi to agar inzaal ho bhi gaya tab bhi roza na toota

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 117

*MASLA* – Aurat ne mard ko sohbat karne par majboor kiya to aurat par qaza ke saath kaffarah bhi waajib hai mard par sirf qaza

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 122

*MASLA* – Aurat ko muyayyan taareekh par haiz aata tha aaj haiz aane ka din tha usne kasdan roza tod diya magar haiz na aaya to kaffarah nahin sirf qaza karegi yunhi subah hone ke baad paak huyi aur niyat karli to aajka roza nahin hua

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 123/119

*MASLA* – Koi cheez khareedi aur chakhna zaruri hai ki agar na chakhega to nuksan hoga to ijazat hai ki chakh le yunhi shauhar bad mizaaj hai ki namak wagairah ki kami beshi par cheekhta chillata hai to aurat ko hukm hai ki namak chakh le magar chakhne se muraad ye hai ki zabaan par rakhkar maza mahsoos karke fauran thook de warena agar nigal liya to roza jaata raha balki agar sharayat paaye gaye to kaffarah bhi laazim hoga

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 125

*MASLA* – Ramzan ke dino me aisa kaam karna jayaz nahin jisse roza na rakh sake balki hukm ye hai ki agar roza rakhega aur kamzori mahsoos hogi aur khade hokar namaz na padh sakega to bhi roza rakhe aur baith kar namaz padhe lekin ye tab hi hai jab ki bilkul hi khada na ho sake warna baithkar namaz na hogi

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 126

*ⓩ Magar maaz ALLAH aaj ki awaam ka khayal to ye hai ki ramzan ibaadat ke liye nahin balki kamane ke liye aata hai 10 ghanta kaam karne waala 12 ghanta kaam karta hai 12 ghnate waala 16 ghanta aur kuchh to raato din paisa kamane me jut jaate hain jabki hukm to ye hai ki naan bai majdoor aur har mehnat kash aadmi sirf aadhe din hi kaam kare aur aadhe din aaraam kare taaki roza rakh sake,magar maaz ALLAH summa maaz ALLAH aajke naam nihaad musalmano ko na to roze ki khabar hai aur na namaz ki fiqr din bhar usi tarah khaana peena jaise ki koi baat hi nahin aur uspar turra ye ki hum musalman hain jannati hain agar deen par baat aayi to jaan de denge sar kata denge are jin kambakhto se din bhar bhookha pyasa nahin raha jaata wo gardan kya khaaq katayenge,maula aiso ko hidayat ata farmaye*

*MASLA* – Daanto me koi cheez fasi rah gayi to agar wo bagair thook ki madad se halaq se neeche utar sakti hai aur nigal gaya to roza toot gaya aur itni khafeef hai ki thook ke saath hi utar sakti hai aur nigla to nahin toota yunhi munh se khoon nikla aur halaq se utra to agar maza mahsoos hua to roza toot gaya aur agar khoon kam tha ya maza mahsoos na hua to nahin toota

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 116

*MASLA* – Dora bat raha tha baar baar tar karne ke liye munh se guzaara to agar uski rangat ya maza mahsoos na hua to roza nahin gaya lekin dore ki ratubat agar thook ke zariye nigla to roza toot gaya

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 117

*MASLA* – Ye gumaan tha ki abhi subah nahin huyi aur khaaya piya ya jima kiya aur baad ko maloom hua ki subah ho chuki thi ya kisi ne jabran khilaya to in soorton me sirf qaza hai kaffarah nahin

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 118

*MASLA* – Nightfall hua aur use maloom tha ki roza nahin toota phir uske baad bhi khaya piya to ab kaffarah laazim hai

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 121

*MASLA* – Agar kisi ka roza galti se toot jaaye to phir bhi use maghrib tak kuchh bhi khaana peena jayaz nahin hai poora din misl roze ke hi guzaarna waajib hai yunhi jo shakhs ramzan me khule aam khaaye piye hukm hai ki use qatl kiya jaaye

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 118/119

*MASLA* – Rozedaar wuzu me kulli karne aur naak me paani chadhane me mubaalga na kare

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 126

*ⓩ Matlab ye ki itna paani munh me na bhar le ki halaq tak pahunch jaaye ya naak me itna na chadhaye ki dimaag tak pahunch jaaye warna roza toot jayega,ek masla ye bhi zahan me rakhen ki agar koi raat ko junub hua yaani gusl farz hua to behtar hai ki sahri ke waqt hi gusl karle aur agar nahin kiya yaani waqte sahar khatm ho gaya to ab gusl ke 3 farayaz me se 2 uspar se saakit ho gaya yaani kulli is tarah karna ki halaq tak paani pahunch jaaye aur naak ki narm haddi tak paani chadhana ye dono maaf hai ab bas sar se lekar pair tak ek baal barabar bhi sookha na rahne paaye ias tarah paani bahale paak ho jayega*

*MASLA* – Sahri khaane me deir karna mustahab hai magar itni deir na karein ki waqte sahar hi khatm ho jaaye yunhi aftaar me jaldi karna bhi mustahab hai magar itni jaldi bhi na ho ki suraj hi guroob na hua ho

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 126

*ⓩ Baaz log azaan ko hi khatme sahar samajhte hain ye unki galat fahmi hai maslan aaj Allahabad me khatme sahar 3:46 par tha to kam se kam ehtiyatan 3 minute pahle yaani 3:43 par hi khaana peena chhod dein yunhi agar fajr padhni ho to kam se kam ehtiyatan 3 minute aur jod dein yaani 3:49 par fajr padh sakte hain,khaane peene me waqt ka lihaaz karen kyunki khatme sahar ke baad agar ek boond paani ya ek daana bhi munh me daala to roza shuru hi nahin hoga agar che abhi azaan huyi ho ya na huyi ho agar che wo niyat bhi karle aur din bhar misl roza bhookha pyasa bhi rahe,lihaza waqt ka lihaaz karen*

*MASLA* – Miswaak karna sunnat hai agar che khushk ho ya paani se tar ho agar che halaq me uski kadwahat mahsoos bhi hoti ho

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 125

*MASLA* – Roze ki haalat me miyan biwi ka ek doosre ke badan ko chhoona choomna gale lagana makruh hai agar bagair sohbat ke bhi inzaal hua to roza toot jayega

📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 125

*MASLA* – Aftaar ke waqt jo dua padhi jaati hai wo ek do luqma khaane baad hi padhi jaaye bismillah sharif ke saath roza kholen phir dua padhen

📕 Fatawa razviyah,jild 1,safah 13

*MASLA* – Sharayi uzr ki wajah se roza na rakhne ki ijazat hai baad ramzan rozo ki qaza kare,ye sharayi uzr hain 1.bimaari 2.safar 3.aurat ko hamal ho ya doodh pilane ki muddat me ho 4.sakht budhapa 5.behad kamzori 6.jaan jaane ka darr

📕 Durre mukhtar,jild 2,safah 115
📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 130

*MASLA* – Inme se shaikhe faani yaani bahut zyada boodha aur aisa beemar jiske theek hone ki ummed na ho to unhein har roze badle 2 kg 47 gram gehun ki keemat yaani taqriban 60 rs. fidiya ada karna hoga

📕 Durre mukhtar,jild 2,safah 119

*MASLA* – Sharayi uzr ki wajah se roza na rakha aur fidiya deta raha magar agla ramzan aane se pahle uska uzr jaata raha to ab rozo ki qaza farz hai kyunki uske saare fidiye ab nafl ho gaye

📕 Durre mukhtar,jild 2,safah 115
📕 Bahare shariyat,hissa 5,safah 133

*ⓩ Jin logon ko sharayi uzr ki wajah se roza na rakhne ki rukhsat hai unhein bhi alal elaan khaane peene ki ijazat nahin hai yunhi Jin logon ka roza kisi galti ki wajah se toot jaaye unko bhi shaam tak kuchh bhi khaane peene ki ijazat nahin hai,lihaza iska khayal rakhen*

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*NAUSHAD AHMAD “ZEB” RAZVI*
*ALLAHABAD*

By Zebnews

3 thoughts on “MASAIL-E ROZA”
  1. Assalamualaikum
    Shubhan Allah Shubhan Allah
    16.5.19
    Aj apki post par gor Kiya to samajh me aya mujhe laga apne ramzan Mubarak me message chote Kar diye
    Masha Allah Bhaijan website par upload Kar rahe ho

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