Tue. Jun 15th, 2021

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*हिन्दी/hinglish*             *आसारे क़यामत-26*

*दोज़ख*

*कंज़ुल ईमान* – ऐ ईमान वालो अपने आपको और अपने घर वालो को उस आग से बचाओ जिसका ईंधन इंसान और पत्थर हैं

📕 पारा 28,सूरह तहरीम,आयत 6

*ⓩ जब हमारा कोई अज़ीज़ घर से बाहर जाता है तो हम क्या करते हैं उसे तअक़ीद करते हैं कि देखो संभल कर जाना गाड़ी धीरे चलाना उस रास्ते से मत जाना धूप बहुत तेज़ है सर ढ़क कर जाना वग़ैरह वग़ैरह,हम ये सब क्यों करते हैं क्योंकि हम उससे प्यार करते हैं वो हमारा अज़ीज़ है उसकी फिक्र करना हमारी ज़िम्मेदारी है,यहां तक कि बात समझ मे आ गई हो तो आईये उस आयत की तरफ लौटते हैं अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त जहन्नम से बचने के लिए फरमा रहा है किससे फरमा रहा है अपने सारे बन्दों को नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों को,और वो भी किस प्यारे अन्दाज़ से कि ऐ ईमान वालों,क़ुर्बान जाईये अपने रब पर कि वो हमसे मुहब्बत करता है जब ही तो हमारी फिक्र कर रहा है,वरना उसे क्या है अगर सारी दुनिया भी उसकी इबादत में लग जाए तो क्या उसकी अज़मतों बुलंदी को ज़र्रा बराबर भी बढ़ा पायेगी हरगिज़ नहीं और अगर सारी दुनिया भी मिलकर उसकी नाफरमानी करने लग जाए तो क्या उसका ज़र्रा बराबर भी कुछ बिगाड़ लेगी हरगिज़ नहीं,कौन जन्नत में जाता है और कौन जहन्नम में इससे उसे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन लेकिन लेकिन अगर मुसलमान जहन्नम में जायेगा तो उसके महबूब सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम को तकलीफ होगी और उसके महबूब को तकलीफ हो ये उसे हरगिज़ गवारा नहीं सिर्फ इसलिये हमें उस आग से बचने को कह रहा है,तो ऐ मोमिनो ज़रा सोचिये कि जब हमारा रब अपने महबूब सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम की खातिर हमसे इतनी मुहब्बत करता है तो क्या हमें ये ज़ेब देता है कि हम उसकी नाफरमानी करें उसके खिलाफ जायें उसकी नाशुक्री करें और उसके महबूब सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम को तकलीफ पहुचांये और वो भी अपनी ही जानों पर ज़ुल्म करके कि अगर हम उसकी नाफरमानी करेंगे तो नुक्सान तो हमारा ही होगा हम खुद ही उस आग का ईंधन बन जायेंगे यानि जहन्नम में झोंक दिये जायेंगे,हमारा प्यारा रब जिस आग से हमें बचने के लिए फरमा रहा है आईये उसके बारे में भी कुछ जान लें कि आखिर वो है क्या*

*फुक़्हा* – ये एक मकान है जो काफिरों और नाफरमानो के लिए बनाया गया है ये अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के जलाल व क़हर का मज़हर है,जिस तरह उसकी रहमत की इन्तिहा नहीं उसी तरह उसके क़हरो गज़ब की भी कोई हद नहीं

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 1,सफह 48

*हदीस* – क़यामत के दिन दोज़ख को 7वी ज़मीन के नीचे से खींचकर इस तरह लाया जायेगा कि उसकी 70000 लगामें होंगी और हर लगाम को 70000 फरिश्ते खींच रहे होंगे और इसी तरह उसे अर्श की बाईं जानिब लाकर रखा जायेगा

📕 तिर्मिज़ी,जिल्द 2,सफह 197
📕 तकमीलुल ईमान,सफह 24
📕 उम्दतुल क़ारी,जिल्द 7,सफह 269

*हदीस* – उसकी एक गर्दन होगी उसकी आंख होगी जिससे देखेगी दो कान होंगे जिससे सुनेगी और ज़बान होगी जिससे वो बोलेगी कि मैं 3 किस्म के शख्सों पर मुसल्लत की गई हूं 1.घमण्डी 2.मुश्रिक और 3.तस्वीर बनाने वालों पर

📕 तिर्मिज़ी,जिल्द 2,सफह 197

*कंज़ुल ईमान* – उसके 7 दरवाज़े हैं हर दरवाज़े के लिए उनमें से एक हिस्सा बटा हुआ है

📕 पारा 14,सूरह हजर,आयत 44

*ⓩ मगर फुक़्हा दरवाज़े से मुराद उसके 7 तबक़ात लेते हैं जैसा कि दूसरी जगह इरशाद हुआ*

*कंज़ुल ईमान* – बेशक मुनाफिक़ दोज़ख के सबसे नीचे तबक़े में हैं

📕 पारा 5,सूरह निसा,आयत 145

*ⓩ मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की एक रिवायत के मुताबिक़ दोज़ख के दरवाज़े ऊपर से नीचे की जानिब हैं,इससे पता चलता है कि दरवाज़े तो 7 ही हैं मगर उन 7 तबकों के लिए अलग अलग है,आईये उन तबकों की तारीफ भी जान लेते हैं*

*1.जहन्नम* – ये सबसे ऊपर का तबक़ा है इसमें गुनहगार मुसलमान डाले जायेंगे

*2.सईर* – ईसाईओं के लिए है

*3.हुत्मा* – यहूदियों के लिए

*4.लज़्ज़ी* – इब्लीस और उसके ताबेदारों के लिए

*5.सक़र* – चांद सूरज सितारों की पूजा करने वालों के लिए

*6.जहीम* – तमाम कुफ्फार व मुशरेकीन के लिए

*7.हाविया* – मुनाफेक़ीन व फिरऔनियों के लिए

📕 दक़ाइक़ुल अखबार,सफह 35
📕 खज़ाईनुल इरफान,सफह 382

*अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन नार*
*अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन नार*
*अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन नार*

जारी रहेगा………..

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*KANZUL IMAAN* – Ai imaan waalo apne aapko aur apne ghar waalo ko us aag se bachao jiska eendhan insaan aur patthar hain

📕 Paara 28,surah tahreem,aayat 6

*ⓩ Jab hamara koi azeez ghar se baahar jaata hai to hum kya karte hain use taqeed karte hain ki dekho sambhal kar jaana gaadi dheere chalana us raaste se mat jaana dhoop bahut tez hai sar dhankkar jaana wagairah wagairah,hum ye sab kyun kahte hain kyunki hum usse pyaar karte hain wo hamara azeez hai aur uski fikr karna hamari zimmedari hai,yahan tak ki baat samajh me aa gayi ho to aayiye ab us aayat ki taraf lautte hain ALLAH rabbul izzat jahannam se bachne ke liye farma raha hai kisse farma raha hai apne saare bando ko nahin balki sirf aur sirf musalmano ko aur wo bhi kis pyare andaaz se ki ai imaan waalo,qurbaan jayiye apne rub par ki wo humse muhabbat karta hai jab hi to hamari fikr kar raha hai warna use kya hai agar saari duniya bhi milkar uski ibaadat me lag jaaye to kya zarra barabar bhi uski azmato bulandi ko badha payegi hargiz nahin aur agar saari duniya bhi milkar uski naafarmani me lag jaaye to kya zarra barabar bhi uska kuchh bigaad payegi hargiz nahin,kaun jannat me jaata hai aur kaun jahannam me isse use koi farq nahin padta lekin lekin lekin agar musalman jahannam me jayega to uske mahboob sallallahu taala alaihi wasallam ko taqleef hogi aur uske mahboob ko taqleef ho ye use hargiz gawara nahin sirf isliye hamein us aag se banchne ko kah raha hai,to ai momino zara sochiye ki jab hamara rub apne mahboob sallallahu taala alaihi wasallam ki khaatir humse itni muhabbat karta hai to kya hamein ye zeb deta hai ki hum uski nafarmani karein uske khilaf jaayein uski nashukri karen aur uske mahboob sallallahu taala alaihi wasallam ko taqleef pahunchaye aur wo apni hi jaano par zulm karke ki agar hum uski nafarmani karenge to nuksaan to hamara hi hoga hum khud hi us aag ka eendhan ban jayenge,hamara pyara rub jis aag se hamein bachne ko kah raha hai aayiye uske baare me bhi kuchh jaan lein ki aakhir wo hai kya*

*FUQHA* – Ye ek makaan hai jo ALLAH rabbul izzat ke jalaal wa qahar ka mazhar hai,jis tarah ki uski rahmat ki inteha nahin usi tarah uske qahro gazab ki bhi koi had nahin,ise kaafiro aur nafarmano ke liye banaya gaya hai

📕 Bahare shariyat,hissa 1,safah 48

*HADEES* – Qayamat ke din dozakh ko 7wi zameen ke neeche se kheenchkar is tarah laaya jayega ki uski 70000 lagamein hongi aur har lagaam ko 70000 farishte kheench rahe honge aur isi tarah use arsh ki baayin jaanib laakar rakha jayega

📕 Tirmizi,jild 2,safah 197
📕 Takmilul imaan,safah 24
📕 Umdatul qaari,jild 7,safah 269

*HADEES* – Uski ek gardan hogi uski aankh hogi jisse dekhegi do kaan honge jisse sunegi aur zabaan hogi jisse wo bolegi ki main 3 kism ke shakhso par musallat ki gayi hoon 1.Ghamandi 2.Mushrik aur 3.Tasweer banane waalo par

📕 Tirmizi,jild 2,safah 197

*KANZUL IMAAN* – Uske 7 darwaze hain har darwaze ke liye unme se ek hissa bata hua hai

📕 Paara 14,surah hajar,aayat 44

*ⓩ Magar fuqha darwaze se muraad uske 7 tabqaat lete hain jaisa ki doosri jagah irshaad hua*

*KANZUL IMAAN* – Beshak munafiq dozakh ke sabse neeche tabqe me hain

📕 Paara 5,surah nisa,aayat 145

*ⓩ Maula ali raziyallahu taala anhu ki ek riwayat ke mutabiq dozakh ke darwaze oopar se neeche ki jaanib hain,isse pata chalta hai ki darwaze to 7 hi hain magar un 7 tabqo ke liye alag alag,aayiye un tabqo ki tareef bhi jaan lete hain*

*1.Jahannam* – Ye sabse oopar ka tabqa hai isme gunahgaar musalman daale jayenge

*2.Saeer* – Eesayion ke liye hai

*3.Hutma* – Yahudiyon ke liye

*4.Lazzi* – Iblees aur uske tabedaaro ke liye

*5.Saqar* – Chaand suraj sitaro ki pooja karne waalo ke liye

*6.Jaheem* – Tamam kuffar wa mushrekeen ke liye

*7.Haawiya* – Munafeqeen wa firauniyo ke liye

📕 Daqaiqul akhbar,safah 35
📕 Khazayenul irfan,safah 382

*ALLAHUMMA AJIRNI MINAN NAAR*
*ALLAHUMMA AJIRNI MINAN NAAR*
*ALLAHUMMA AJIRNI MINAN NAAR*

To be continued……….

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NAUSHAD AHMAD ZEB RAZVI
ALLAHABAD

By Zebnews

4 thoughts on “DOZAKH-26”
    1. Agar website banane ke baad bhi mujhe aapko msg bhejna pade to phir website banane ka kya maqsad hua,sab yahin upload hai bhai search kijiye nikaal lijiye jo aapko zarurat ho

      jazak ALLAH

  1. अस्सलामु अलयकुम !

    भाई आपने बहुत बहेतरीन काम किया है!
    अल्लाह आपको इसका अच्छा बदला दुनिया में भी दे और आखेरत में भी दे !

    सब से बड़ी बात आप ने उर्दू किताबो को हिन्दी फोन्ट में टाइप करने की जो महेनत की है वोह बे शक काबिले तारीफ है ! इतनी महेनत करना किसी से मुमकिन नहीं !

    अगर माली तौर पर में आपके इस काम में कुछ मदद कर सकू तो बताइएगा, मै अपनी हैसियत के मुतबिक़ जरूर कुछ ना कुछ करने की कोशिश करूंगा….. इंशा अल्लाह !!

    अल्लाह हाफ़िज़

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